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राज्यों के उद्योग

बिहार के टॉप 5 उद्योग: कौन से हैं और नया उद्यमी कहां से शुरू करे

बिहार के प्रमुख उद्योग
विषय-सूची 10 भाग
  1. बिहार के टॉप 5 उद्योग एक नज़र में: कौन सा उद्योग किसके लिए
  2. मखाना और खाद्य प्रसंस्करण: कोसी के खेत से निर्यात तक
  3. सुधा और डेयरी: रोज़ बिकने वाला उद्योग
  4. चीनी और इथेनॉल: बंद मिलें दोबारा क्यों खुल रही हैं
  5. रेशम, कपड़ा और चमड़ा: भागलपुर से निर्यात तक
  6. बरौनी रिफाइनरी और रसायन: बड़ी इकाई के आसपास सप्लायर बनने का रास्ता
  7. फैक्ट्री के लिए ज़मीन और मंज़ूरी: BIADA से कहां मिलेगी जगह
  8. अभी कौन सी प्रोत्साहन योजना चालू है
  9. अपना उद्योग चुनने के बाद पहले चार कदम
  10. बिहार के उद्योगों पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिहार के टॉप 5 उद्योग हैं: मखाना और खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी (सुधा), चीनी और इथेनॉल, रेशम, कपड़ा और चमड़ा, और बरौनी रिफाइनरी के आसपास का पेट्रोलियम और रसायन उद्योग। यह कोई सरकारी रैंकिंग नहीं है। इन पांच को इसलिए चुना गया है कि इनमें तीन चीज़ें एक साथ मिलती हैं: कच्चा माल बिहार में ही उगता या बनता है, कोई बड़ा खरीदार या संस्था पहले से मौजूद है, और सरकार का प्रोत्साहन अभी चालू है।

नए उद्यमी के लिए फ़ैसला सीधा है: पूंजी कम हो तो मखाना या डेयरी से शुरू करें, क्योंकि इनमें छोटी इकाई से काम चल जाता है। चीनी मिल, इथेनॉल प्लांट और रसायन इकाई में करोड़ों की पूंजी लगती है, इसलिए वहां पहले किसी बड़ी इकाई के सप्लायर या सहायक के रूप में उतरना समझदारी है।

बिहार के टॉप 5 उद्योग एक नज़र में: कौन सा उद्योग किसके लिए

झारखंड बनने (2000) के बाद ज़्यादातर खनिज वहीं चले गए, इसलिए संस्कृति IAS की सामग्री के अनुसार बिहार में उद्योग की असली संभावना खेती पर टिकी है। तालिका में हर उद्योग का आधार और नए उद्यमी के घुसने की जगह है।

उद्योगबिहार में आधारनया उद्यमी कहां घुसेपूंजी का स्तर
मखाना और खाद्य प्रसंस्करणकोसी के जिले, मक्कापॉपिंग, ग्रेडिंग, पैकिंगछोटी से शुरू
डेयरीसुधा का सहकारी नेटवर्ककोल्ड चेन, पशु आहार, स्थानीय उत्पादछोटी से मध्यम
चीनी और इथेनॉलगन्ना, मक्का, बंद मिलों का पुनरुद्धारमिल, इथेनॉल, गुड़, बगासबड़ी
रेशम, कपड़ा, चमड़ाभागलपुर, फुलवारीशरीफ, दुमरांव, गयाबुनाई, परिधान, चमड़ा उत्पादछोटी से मध्यम
पेट्रोलियम और रसायनबरौनी रिफाइनरीप्लास्टिक उत्पाद, सप्लाई और सेवाएंबड़ी

पूंजी का स्तर मोटा अंदाज़ा है। असली रकम क्षमता, मशीन और जिले पर निर्भर करती है।

मखाना और खाद्य प्रसंस्करण: कोसी के खेत से निर्यात तक

भारत का करीब तीन चौथाई मखाना बिहार में होता है। PIB के दस्तावेज़ के अनुसार 2025-26 में उत्पादन 60,000 टन रहा, और खेती कोसी क्षेत्र के सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में सबसे ज़्यादा है। मिथिला मखाना को GI टैग मिला है और राष्ट्रीय मखाना बोर्ड 15 सितंबर 2025 को बिहार में शुरू हुआ।

राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र ने पॉपिंग और ग्रेडिंग मशीनें निर्माताओं को लाइसेंस पर दी हैं और 24 उद्यमों को तकनीकी मदद दी है। IBEF के अनुसार जुलाई 2026 में फ्लेवर्ड मखाने की पहली समुद्री खेप कनाडा गई। यह खेप तैयार उत्पाद की थी, इसलिए कच्चा बेचने के बजाय पैक्ड उत्पाद की ओर जाना बेहतर दांव है। बाकी विकल्प खाद्य प्रसंस्करण के कारोबार विचार में हैं।

सुधा और डेयरी: रोज़ बिकने वाला उद्योग

बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (COMFED) 1983 में बना और सुधा ब्रांड से दूध बेचता है। संघ के सरकारी पेज के अनुसार उसकी 32,244 ग्राम स्तर की समितियों से लगभग 14.85 लाख किसान जुड़े हैं, 22 डेयरी प्लांट (तीन झारखंड में) की कुल क्षमता 54.05 लाख लीटर रोज़ है, और 2025-26 में संघ और उसकी इकाइयों का कारोबार ₹6,650 करोड़ रहा।

सुधा की सूची में घी, पनीर, दही, लस्सी, मिठाइयां, मिल्क पाउडर और आइसक्रीम जैसे उत्पाद हैं। पहले देखें कि आपका उत्पाद किससे भिड़ेगा। सीधा मुकाबला हो तो दूध के परिवहन, कोल्ड चेन या पशु आहार जैसे सहायक काम सोचें। प्लांट की जानकारी डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट गाइड में है।

चीनी और इथेनॉल: बंद मिलें दोबारा क्यों खुल रही हैं

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार रीगा चीनी मिल 2024-25 में दोबारा चालू हुई। Agro Spectrum India की 11 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 9 और 10 सितंबर के दिल्ली निवेशक सम्मेलन में बिहार गन्ना निवेश नीति 2026 पेश हुई और राज्य ने 25 नई मिलों का लक्ष्य रखा। आजतक के अनुसार प्रधानमंत्री मधुबनी की सकरी और दरभंगा की रैयम की बंद मिलों की आधारशिला रखने वाले हैं।

इथेनॉल में मक्का भी जुड़ गया है। Earth Journalism Network की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र ने बिहार में 47 इथेनॉल प्लांट मंज़ूर किए थे, जिनमें कम से कम 32 अनाज आधारित हैं। एक शोधकर्ता ने चेताया कि मांग बढ़ने से मक्का महंगा हो सकता है, इसलिए प्लांट से पहले अपने जिले में मक्का की उपलब्धता गिनें। प्रक्रिया के लिए चीनी मिल और बायोएथेनॉल निर्माण गाइड देखें।

रेशम, कपड़ा और चमड़ा: भागलपुर से निर्यात तक

Incredible India के पेज के अनुसार भागलपुर के रेशम से 35,000 से ज़्यादा बुनकर और 25,000 करघे जुड़े हैं, इसे 2013 में GI दर्जा मिला है और यह पश्चिम एशिया, यूरोप, अमेरिका और जापान तक बिकता है। सूती कपड़े की इकाइयां फुलवारीशरीफ, दुमरांव और गया में हैं (संस्कृति IAS), और IBEF चमड़े को भी बिहार के प्रमुख उद्योगों में गिनता है।

2022 की टेक्सटाइल और लेदर नीति में पूंजी अनुदान, बिजली अनुदान, रोज़गार अनुदान और ब्याज सब्सिडी जैसे प्रावधान हैं, जिनकी दरें बदलती रहती हैं, इसलिए आवेदन से पहले उद्योग विभाग से मौजूदा दर मिलाएं। विचार कपड़ा उद्योग के कारोबार में हैं।

बरौनी रिफाइनरी और रसायन: बड़ी इकाई के आसपास सप्लायर बनने का रास्ता

इंडियन ऑयल की बरौनी रिफाइनरी बिहार की बड़ी औद्योगिक इकाइयों में है। आउटलुक बिज़नेस की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार उसकी क्षमता 60 लाख टन सालाना थी, जिसे 90 लाख टन करने और 2 लाख टन का पॉलीप्रोपिलीन प्लांट जोड़ने पर करीब ₹16,000 करोड़ लग रहे थे। पॉलीप्रोपिलीन प्लास्टिक उत्पादों का कच्चा माल है, इसलिए रिफाइनरी के पास पैकेजिंग या पाइप जैसी इकाइयों की गुंजाइश बनती है, गारंटी नहीं। विस्तार की ताज़ा स्थिति इंडियन ऑयल से मिलाएं। प्लास्टिक उत्पादों के विचार प्लास्टिक कारोबार में हैं।

फैक्ट्री के लिए ज़मीन और मंज़ूरी: BIADA से कहां मिलेगी जगह

औद्योगिक ज़मीन और शेड बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) देता है। अक्टूबर 2026 में उसकी वेबसाइट पर ज़मीन के नौ ठिकाने दिखे, जैसे बेगूसराय, हाजीपुर, मुज़फ़्फ़रपुर, मोतीपुर, पटना और बिहटा। उपलब्ध ज़मीन हर जगह अलग है: मोतीपुर में लगभग 281.85 एकड़ और बिहटा में लगभग 65.27 एकड़।

उद्योग विभाग की जून 2026 की अधिसूचना में राज्य निवेश संवर्धन बोर्ड के सचिवालय को मंज़ूरियों की एकल नोडल एजेंसी बनाया गया है। Elets की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 में कैबिनेट ने औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ₹25,000 करोड़ की योजना भी मंज़ूर की। अन्य राज्यों के लिए राज्यवार उद्योग पेज देखें।

अभी कौन सी प्रोत्साहन योजना चालू है

अक्टूबर 2026 तक बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (BIIPP) 2025 चालू है। उसी Elets रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट ने जुलाई 2026 में इसकी समय सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई, या नई औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 के लागू होने तक, जो पहले हो। Drishti IAS के सारांश के अनुसार निवेशक तीन में से एक मॉडल चुनते हैं: ₹40 करोड़ तक की ब्याज सब्सिडी, 14 साल की SGST वापसी, या स्वीकृत प्रोजेक्ट लागत पर 30% पूंजी सब्सिडी।

IBEF के अनुसार मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना में महिलाओं को सूक्ष्म और लघु उद्यम शुरू या बढ़ाने के लिए ₹2 लाख तक की सहायता मिलती है। बाकी योजनाएं बिहार की सरकारी योजनाएं पेज पर हैं।

अपना उद्योग चुनने के बाद पहले चार कदम

  1. अपनी ताकत गिनें: कच्चे माल तक पहुंच (मखाना, गन्ना, मक्का, दूध), बुनाई जैसा हुनर, या बड़ी पूंजी। इससे तय होगा कि आप तालिका की किस पंक्ति में बैठते हैं।
  2. खरीदार से पहले बात करें। सुधा समिति, चीनी मिल, निर्यातक या रिफाइनरी, जो भी आपका ग्राहक हो, उससे पूछें कि वह किस क्वालिटी और दाम पर माल लेगा।
  3. BIADA की साइट पर अपने जिले की ज़मीन या शेड देखें, और उद्योग विभाग से पूछें कि BIIPP 2025 का कौन सा मॉडल आप पर लागू होगा।
  4. अपनी इकाई की अलग प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनवाएं। इस पेज के आंकड़े सामान्य संकेत हैं। क्षमता, मशीन और जिले के साथ लागत बदलती है, और बैंक ऋण के लिए आपकी इकाई का अपना हिसाब चाहिए।

₹2 लाख जैसे कम बजट में छोटा काम खोज रहे हों तो बिहार के बिज़नेस आइडिया पेज देखें।

बिहार के उद्योगों पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिहार का सबसे पुराना उद्योग कौन सा है?

रेशम और चीनी सबसे पुराने उद्योगों में आते हैं। Incredible India के अनुसार भागलपुर का रेशम उद्योग 200 साल से ज़्यादा पुराना है, जबकि संस्कृति IAS के अनुसार पहली चीनी मिल 1904 में सारण के मढ़ौरा में लगी। यानी परंपरा के हिसाब से रेशम पुराना है और कारखाने के हिसाब से चीनी।

बिहार में सबसे बड़ी फैक्ट्री कौन सी है?

बिहार की फैक्ट्रियों की कोई आधिकारिक आकार सूची हमें नहीं मिली, इसलिए किसी एक को सबसे बड़ी कहना ठीक नहीं होगा। इंडियन ऑयल की बरौनी रिफाइनरी राज्य की बड़ी इकाइयों में है। नए निवेशक के लिए सवाल यह है कि ऐसी बड़ी इकाई का सप्लायर कैसे बना जाए।

बिहार में कितनी फैक्ट्री बन रही है?

कुल संख्या का ताज़ा आधिकारिक आंकड़ा हमें नहीं मिला। Swarajya के अनुसार जुलाई 2026 में BIADA की प्रोजेक्ट क्लियरेंस कमेटी ने 29 नई परियोजनाएं मंज़ूर कीं, जिनमें करीब ₹6,000 करोड़ का निवेश और लगभग 3,000 सीधी नौकरियां बताई गईं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, कपड़ा और खाद्य प्रसंस्करण की इकाइयां शामिल हैं।

12 महीने चलने वाला बिज़नेस कौन सा है?

डेयरी, क्योंकि दूध की खपत रोज़ होती है। COMFED के अनुसार 2025-26 में सुधा के पैकेट दूध की औसत बिक्री 18.11 लाख लीटर रोज़ रही। जिन उद्योगों का कच्चा माल फसल से आता है, उनमें भंडारण का इंतज़ाम पहले सोचना पड़ता है।

Diksha Garg

लेखक:

Diksha GargEntrepreneurship Development and Market Research

Diksha Garg works in entrepreneurship development, industrial operations and market research. She holds a BBA from Rukmini Devi Institute of Advanced Studies and studied at IILM from 2019 to 2021. Her experience includes an executive traineeship at HDFC Bank and a financial analyst internship at Bajaj Allianz. She researches the costs, approvals and market data in these business guides, which are reviewed by NPCS founder Ajay Kumar Gupta.

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समीक्षक: Ajay Kumar Gupta, Founder, Niir Project Consultancy Services (NPCS)

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