भारत के गांवों और छोटे कस्बों में पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक हुनर — बढ़ईगीरी, लोहारी, कुम्हारी, दर्जीगीरी, सुनारी और ऐसे ही कई काम — आज भी लाखों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। लेकिन आधुनिक उपकरणों और पूंजी की कमी के कारण ये कारीगर अक्सर पीछे रह जाते हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर भारत सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) शुरू की, जो विशेष रूप से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को मान्यता, प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, और सस्ती दर पर ऋण देने के लिए बनाई गई है।
यदि आप ‘विश्वकर्मा योजना में कितना लोन मिलता है’, ‘विश्वकर्मा योजना के लिए कौन पात्र है’, या ‘फ्री सिलाई मशीन योजना कैसे मिलेगी’ जैसे सवालों के जवाब खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए पूरी और अद्यतन जानकारी प्रदान करेगा।
पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा शत-प्रतिशत केंद्र वित्त पोषित इस योजना का बजट 5 वर्षों (वित्त वर्ष 2024 से 2028) के लिए ₹13,000 करोड़ निर्धारित किया गया है, जिससे देशभर के लगभग 30 लाख कारीगर परिवारों को लाभ मिलने का अनुमान है। योजना का उद्देश्य कारीगरों और शिल्पकारों की ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ या पारिवारिक कौशल परंपरा को मजबूत करना, उन्हें आधुनिक बनाना, और औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ना है।(PM Vishwakarma Yojana)
इस योजना के तहत देश की 140 से अधिक जातियों के पारंपरिक कारीगर पात्र हैं, जिनमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, दर्जी, नाई, धोबी, राजमिस्त्री, टोकरी बुनने वाले, और गुड़िया-खिलौना निर्माता जैसे 18 पारंपरिक व्यापार शामिल हैं।
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पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाले लाभ
- पहचान: पात्र कारीगरों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र दिया जाता है
- कौशल प्रशिक्षण: बेसिक और एडवांस्ड — दो स्तर का प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड
- टूलकिट सहायता: आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 तक की सीधी आर्थिक सहायता (ई-वाउचर के रूप में)
- ऋण सुविधा: पहली किस्त में ₹1 लाख और दूसरी किस्त में ₹2 लाख तक — कुल ₹3 लाख तक बिना गारंटी का ऋण, केवल 5% रियायती ब्याज दर पर
- डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन: डिजिटल भुगतान अपनाने पर प्रति लेनदेन प्रोत्साहन राशि
- मार्केट लिंकेज सहायता: उत्पादों को बड़े बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने में सहायता
पात्रता की शर्तें
- आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसकी आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए
- आवेदक असंगठित क्षेत्र में हाथ या औजार से काम करने वाला स्वरोजगार कारीगर या शिल्पकार होना चाहिए
- आवेदक को 18 निर्दिष्ट पारंपरिक व्यापारों में से किसी एक में काम करने का अनुभव या कार्य ज्ञान होना चाहिए
- एक परिवार से केवल एक ही सदस्य (पति या पत्नी) योजना के तहत टूलकिट व लोन का लाभ ले सकता है
- आवेदक ने पिछले 5 वर्षों में किसी अन्य समान क्रेडिट-आधारित सरकारी योजना (जैसे PMEGP) के तहत लोन न लिया हो

आवेदन प्रक्रिया: चरण-दर-चरण
चरण 1: पंजीकरण
सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर जाकर आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से पंजीकरण करना होता है। आधार e-KYC प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही अगला चरण खुलता है। जो लोग स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अटल सेवा केंद्र के माध्यम से भी आवेदन करवा सकते हैं।(PM Vishwakarma Yojana)
चरण 2: कारीगर पंजीकरण फॉर्म भरना
पंजीकरण के बाद कारीगर पंजीकरण फॉर्म में व्यक्तिगत विवरण, व्यापार का प्रकार, और स्थान संबंधी जानकारी भरनी होती है।
चरण 3: सत्यापन
आवेदन ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय (ULB) स्तर पर, फिर जिला अधिकारी (DM/DC) स्तर पर सत्यापित किया जाता है।
चरण 4: कौशल सत्यापन और प्रशिक्षण
सत्यापन के बाद पात्र कारीगर को बेसिक प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है, और स्किल वेरिफिकेशन के बाद ₹15,000 की टूलकिट सहायता जारी की जाती है।
चरण 5: ऋण सुविधा
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कारीगर पहली किस्त के रूप में ₹1 लाख तक का ऋण ले सकता है, और समय पर भुगतान करने पर दूसरी किस्त में ₹2 लाख तक का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध होता है।
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पीएम विश्वकर्मा योजना: महत्वपूर्ण आंकड़े
| श्रेणी | विवरण | महत्व |
| कुल बजट | ₹13,000 करोड़ (5 वर्ष) | बड़े पैमाने पर कारीगरों को कवर करने की क्षमता |
| टूलकिट सहायता | ₹15,000 तक (ई-वाउचर) | आधुनिक उपकरण खरीदने में सीधी मदद |
| पहली किस्त ऋण | ₹1 लाख तक | 5% रियायती ब्याज दर पर, बिना गारंटी |
| दूसरी किस्त ऋण | ₹2 लाख तक | कुल मिलाकर ₹3 लाख तक ऋण उपलब्ध |
| प्रशिक्षण स्टाइपेंड | ₹500/दिन | प्रशिक्षण के दौरान आय का नुकसान नहीं |
| कवर किए गए व्यापार | 18 पारंपरिक ट्रेड | बढ़ई, लोहार, दर्जी, कुम्हार आदि सभी शामिल |
| हेल्पलाइन नंबर | 1800-267-7777 / 17923 | सीधी सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर |
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड (अनिवार्य, e-KYC के लिए)
- मोबाइल नंबर (आधार से लिंक)
- बैंक खाता विवरण
- राशन कार्ड या परिवार पहचान प्रमाण
- पासपोर्ट साइज फोटो
- व्यापार से संबंधित कार्य अनुभव प्रमाण (यदि उपलब्ध हो)
विश्वकर्मा योजना और अन्य योजनाओं के बीच तालमेल
पीएम विश्वकर्मा योजना अन्य सरकारी योजनाओं से अलग है क्योंकि यह विशेष रूप से पारंपरिक हस्तकौशल पर आधारित स्वरोजगार को लक्षित करती है, न कि सामान्य विनिर्माण या सेवा उद्यमों को। जो कारीगर बाद में अपने व्यवसाय को औपचारिक विनिर्माण इकाई के रूप में बड़े पैमाने पर विस्तार करना चाहते हैं, वे विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण और शुरुआती ऋण लेने के बाद PMEGP या मुद्रा योजना के तहत आगे के विस्तार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह क्रमिक दृष्टिकोण छोटे कारीगरों को धीरे-धीरे एक व्यवस्थित व्यवसाय में बदलने में मदद करता है।(PM Vishwakarma Yojana)
पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन के बाद ध्यान रखने योग्य बातें
आवेदन स्वीकृत होने के बाद कारीगरों को चाहिए कि वे अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूरी गंभीरता से भाग लें, क्योंकि यह न केवल टूलकिट सहायता पाने के लिए अनिवार्य है, बल्कि इससे उन्हें अपने पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार ढालने में भी मदद मिलती है। कई कारीगर बेसिक प्रशिक्षण के बाद एडवांस्ड प्रशिक्षण को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह उन्नत प्रशिक्षण उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है।
इसके अलावा, ऋण प्राप्त करने के बाद उसका उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य (उपकरण खरीद, कच्चा माल, या कार्यशील पूंजी) के लिए ही करना चाहिए, क्योंकि समय पर और सही उपयोग के आधार पर ही दूसरी किस्त की स्वीकृति मिलती है। जो कारीगर अपने डिजिटल लेनदेन (जैसे UPI से भुगतान प्राप्त करना) को बढ़ाते हैं, उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का भी लाभ मिलता है, इसलिए डिजिटल भुगतान अपनाना दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद रहता है।
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विश्वकर्मा योजना के तहत सफल कारीगरों के उदाहरण
देशभर में कई कारीगर इस योजना का लाभ उठाकर अपने पारंपरिक व्यवसाय को नई ऊंचाई तक ले गए हैं। उदाहरण के लिए, कई दर्जी विशेष रूप से महिलाओं ने मुफ्त सिलाई मशीन टूलकिट सहायता का उपयोग करके अपने घर पर छोटा बुटीक व्यवसाय शुरू किया है, जो अब स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर ऑनलाइन ऑर्डर भी ले रहे हैं। इसी तरह, कई लोहार और बढ़ई कारीगरों ने आधुनिक उपकरण खरीदकर अपने उत्पादन की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार किया है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह उदाहरण दिखाते हैं कि सही मार्गदर्शन और अनुशासन के साथ इस योजना का उपयोग करने पर कारीगर अपने पारंपरिक काम को एक स्थायी और लाभदायक व्यवसाय में बदल सकते हैं।(PM Vishwakarma Yojana)
पीएम विश्वकर्मा योजना और स्थानीय बाजार तक पहुंच
केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बाजार तक सही पहुंच भी उतनी ही जरूरी है। योजना के तहत मार्केट लिंकेज सहायता के अंतर्गत कारीगरों को सरकारी खरीद पोर्टल GeM (Government e-Marketplace) पर पंजीकरण करने में भी मदद की जाती है, जिससे वे सीधे सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों को अपने उत्पाद बेच सकते हैं। यह विशेष रूप से बढ़ई, लोहार, और अन्य निर्माण-संबंधी कारीगरों के लिए एक स्थिर और बड़ा बाजार खोलता है, जो स्थानीय स्तर पर मिलने वाले सीमित ऑर्डर से कहीं अधिक लाभदायक साबित हो सकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. पीएम विश्वकर्मा योजना में अधिकतम कितना ऋण मिल सकता है?
पात्र कारीगर को दो किस्तों में कुल ₹3 लाख तक का बिना गारंटी ऋण मिल सकता है — पहली किस्त ₹1 लाख और दूसरी किस्त ₹2 लाख, दोनों पर मात्र 5% रियायती ब्याज दर लागू होती है।
2. यह योजना केवल पुरुष कारीगरों के लिए है?
नहीं, यह योजना महिला और पुरुष दोनों कारीगरों के लिए समान रूप से उपलब्ध है। विशेष रूप से दर्जी ट्रेड में बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना का लाभ उठाकर मुफ्त सिलाई मशीन टूलकिट सहायता प्राप्त कर रही हैं।
3. ₹15,000 की टूलकिट सहायता कैसे मिलती है?
बेसिक स्किल ट्रेनिंग शुरू होने पर और स्किल वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद, यह राशि सीधे ई-वाउचर के रूप में दी जाती है, जिसका उपयोग आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए किया जा सकता है।
4. क्या आवेदन के लिए किसी विशेष जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता है?
योजना 140 से अधिक पारंपरिक कारीगर जातियों को कवर करती है, लेकिन मुख्य पात्रता शर्त यह है कि आवेदक वास्तव में उस पारंपरिक व्यापार में सक्रिय रूप से काम कर रहा हो, न कि केवल जाति प्रमाण पत्र होना।
5. क्या दूसरी किस्त का ऋण स्वतः मिल जाता है?
नहीं, दूसरी किस्त का ₹2 लाख तक का ऋण तभी मिलता है जब लाभार्थी ने पहली किस्त के ऋण का समय पर और नियमित भुगतान किया हो, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि ऋण का सदुपयोग हो रहा है।
6. आवेदन की स्थिति कैसे जांचें?
आवेदक आधिकारिक पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर जाकर ‘Applicant/Beneficiary Login’ के माध्यम से अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉगिन करके आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं।
निष्कर्ष
पीएम विश्वकर्मा योजना भारत के उन करोड़ों पारंपरिक कारीगरों के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, जो पीढ़ियों से अपने हाथों के हुनर से देश की सेवा करते आए हैं। ₹15,000 की टूलकिट सहायता, मुफ्त कौशल प्रशिक्षण, स्टाइपेंड, और 5% ब्याज दर पर ₹3 लाख तक का ऋण — यह सब मिलकर कारीगरों को न केवल आर्थिक सहायता देते हैं, बल्कि उनके पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़ने का भी काम करते हैं। यदि आप या आपके परिवार में कोई बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, या ऐसे ही किसी पारंपरिक व्यापार से जुड़ा है, तो आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आज ही पंजीकरण करवाना एक समझदारी भरा कदम होगा।(PM Vishwakarma Yojana)
स्रोत एवं उपयोगी लिंक:
- आधिकारिक पीएम विश्वकर्मा पोर्टल (आवेदन व स्टेटस) — https://pmvishwakarma.gov.in
- MyScheme — सरकारी योजना पोर्टल — https://www.myscheme.gov.in/schemes/pmv
- MSME मंत्रालय / SIDBI — विश्वकर्मा योजना विवरण — https://www.sidbi.in/hi/government-programmes
- उद्यमीमित्र पोर्टल (अन्य सरकारी लोन योजनाएं) — https://www.udyamimitra.in





