लघु उद्योग (छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ) वे होती है जो मध्यम स्तर के विनियोग की सहायता से उत्पादन प्रारम्भ करती हैं। इन इकाइयों मे श्रम शक्ति की मात्रा भी कम होती है और सापेक्षिक रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं का कम मात्रा में उत्पादान किया जाता है। ये बड़े पैमाने के उद्योगो से पूंजी की मात्रा, रोजगार, उत्पादन एवं प्रबन्ध, आगतों एवं निर्गतो के प्रवाह इत्यादि की दृष्टि से भिन्न प्रकार की होती है। ये कुटीर उद्योगोंसे भी इन आधारों पर भिन्न होती हैं- उत्पादन में यंत्रीकरण की मात्रा, मजदूरी पर लगाये गये श्रमिकों एवं परिवारिक श्रमिकों के अनुपात, बाजार का भौगोलिक आकार, विनियोजित पूंजी इत्यादि।
सूक्ष्म, लघु एंव मध्यम उद्योग देश की सम्पूर्ण औद्योगिक अर्थव्यस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते है। यह अनुमान किया जाता है कि मूल्य के अर्थ में यह क्षेत्र निमार्ण की दृष्टि से 39% एवं भारत के कुल निर्यात के 33% के लिए जिम्मेदार है। इस क्षेत्र का लाभ यह है कि इसकी रोजगार क्षमता न्यूनतम पूंजी लागत पर है।
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