Laghu V Griha Udyog, Swarozgar Pariyojanayen (Kutir Udyog), Small Scale Industries (SSI) in Hindi Language लघु एवं गृह उद्योग (स्वरोज़गार परियोजनाएं)

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Laghu V Griha Udyog, Swarozgar Pariyojanayen (Kutir Udyog), Small Scale Industries (SSI) in Hindi Language लघु एवं गृह उद्योग (स्वरोज़गार परियोजनाएं)

Author: NIIR Board
Format: Paperback
ISBN: 8186623868
Code: NI118
Pages: 542
Price: Rs. 600.00   US$ 100.00

Published: 2004
Publisher: National Institute of Industrial Research
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Note: This book is available in Hindi Language only

Laghu V Griha Udyog (Swarozgar Pariyojanayen) Kutir Udyog, Small Scale Industries (SSI) in Hindi
Language



लघु एवं गृह उद्योग (स्वरोज़गार परियोजनाएं)

लघु उद्योग का भारतीय अर्थव्यवस्था में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। प्राचीन काल से ही भारत के लघु व गृह उद्योगों में उत्तम गुणवत्ता वाली वस्तुओं का उत्पादन होता रहा है। उद्यमी बनना या उद्यम स्थापित करना आज काफी आसान हो गया है I क्योंकि हमारी सरकार उद्यम स्थापित के लिए उद्यमियों को कई तरह से प्रोत्साहित करती   है I इसके लिए सरकार विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षणों का आयोजन करती   है जिससे उद्यमियों को उद्योग स्थापना का ज्ञान दिया जा सके I यदि उन्हें उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता की आवयश्कता है तो उन्हें विभिन्न ऋण योजनाओं के माध्यम से ऋण उपलब्ध करवाया जाता है I साथ ही उद्योग स्थापित करने में यदि उन्हें कोई परेशानी आ रही है तो उन्हें उद्योग चलाने हेतु सहायता प्रदान करवाई जाती है I सरकार इस बात के लिए खास तौर पर प्रयत्नशील हैं कि देश भर में उद्यमिता पले व बढे तथा एक ऐसी संस्कृति पल्लवित हो जिसमे स्वरोज़गार, लघु उद्योगों का उत्पादन एवं छोटे उद्यमों की लाभप्रदता बढे I साथ ही जो संभावी अथवा नव उद्यमी हैं उनके कौशल को निखारा जाये I इसके लिए लघु उद्यम विकास संस्थान विभिन्न प्रकार के लाभदायक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं I

लघु उद्योगों ने बीते 50 साल में प्रगति के अनेक सोपान तय किये हैं I हमारे देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में इन उद्योगों का योगदान अहम साबित हुआ है I इन्होने कम पूँजी से रोज़गार उपलब्ध कराये हैं I ग्रामीण इलाको में औद्योगीकरण का प्रकाश फैलाया है तथा क्षेत्रीय असंतुलन में कमी को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है I लघु उद्योग में हुए विकास ने आधुनिक तकनीक अपनाने तथा लाभकारी रोजगार में श्रम शक्ति का अवशोषण करने के लिए उद्यमशीलता की प्रतिभा का उपयोग करने को प्राथमिकता प्रदान की है जिससे उत्पादकता और आय के स्तर को बढ़ाया जा सके। लघु उद्योग उद्योगो के प्रसार तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग में सुविधा प्रदान करते हैं। माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी मुद्रा नामक योजना के अन्तर्गत बेहद छोटे उद्यमियों को 50,000 रूपए से लेकर 10 लाख रूपए तक के कर्ज़ उपलब्ध कराये जाते हैं I इस योजना से लघु उद्योगों के लिए प्रगति का एक नया मार्ग प्रशस्त हुआ है I

लघु उद्योग (Small Scale Industry), स्वरोजगार (Self Employment) व प्रबन्ध क्षेत्रों में मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं। लघु, कुटीर व घरेलू उद्योग परियोजनाएं नए उद्यमी व संभावित उद्यमियों को उद्योग - व्यवसाय की स्थापना व संवर्द्धन की दिशा में प्रेरित करती हैं जिससे वे देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान बढ़ा सकें।


स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया

स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया, भारत के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिये सरकार द्वारा चलाया गया नया अभियान है। ये अभियान देश के युवाओं के लिये नये अवसर प्रदान करने के लिये बनाया गया है। ये पहल युवा उद्यमियों को उद्यमशीलता में शामिल करके बहुत बेहतर भविष्य के लिये प्रोत्साहित करेगी। ये पहल भारत का सही दिशा में नेतृत्व के लिये आवश्यक है।


स्टार्ट अप इंडिया स्टैंड अप इंडिया योजना का मुख्य उद्देश्य उद्यमशीलता को बढ़ावा देना हैं जिससे देश में रोजगार के अवसर बढ़े | यह एक ऐसी योजना हैं जिसके तहत नये छोटे-बड़े उद्योगों को शुरू करने के लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जायेगा जिसमे ऋण सुविधा, उचित मार्गदर्शन एवं अनुकूल वातावरण आदि को शामिल किया गया हैं।

"कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं, मनोरथ से नहीं I क्योंकि सोये हुए जंगल के राजा शेर के मुख्य में भी हिरण स्वयं आकर प्रविष्ट नहीं होते हैं I"

शासन की योजनाएं तो अपनी जगह कायम हैं, इसका लाभ उठाने के लिए उद्यमियों को ही आगे आना होगा I आज जो भी उद्यमी सफलता के शिखर पर खड़े है उन सभी ने इन योजनाओं का लाभ उठाया और अपने परिश्रम के बल पर अपनी इकाइयों की सफलता सुनिश्चित की I

पैसा जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है| हर व्यक्ति अपने जीवन में पैसा कमाना चाहता है I

अगर कोई व्यक्ति अपना खुद का उद्योग स्थापित करना चाहता है तो उसके पास अच्छी प्लानिंग और बिज़नस शुरू करने के लिए पर्याप्त राशि होनी चाहिए । इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है कि कोई कम पैसे मे अपना स्वयं का उद्योग शुरू नहीं कर सकता ।


इस पुस्तक में वित्तीय परियोजना का विवरण दिया गया है और इन वित्तीय परियोजना के माध्यम से विभिन्न उद्योगो की उत्पादन क्षमता (Production Capacity), भूमि एवं भवन (Land & Building), मशीन एवं उपकरण (Machinery & Equipment) तथा कुल अनुमानित लागत (Estimated Capital Investment) आदि की जानकारी दी गयी है। साथ ही कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं (Raw Material Suppliers), संयंत्र और मशीनरी के आपूर्तिकर्ताओं (Plant & Machinery Suppliers) के पते दिए गए है जिससे उद्यमी ज्यादातार लाभ उठा सकें।


नये उद्यमियों, व्यवसायिओं, तकनीकी परामर्शदाताओं आदि के लिए यह पुस्तक अमूल्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी।



The small scale sector is assuming greater importance every day. Hundreds of thousands of people start their own businesses every year, and untold more dream about the possibility of becoming their own bosses. Starting your own business is one of the few remaining paths to wealth. Entrepreneurship is one of the critical decisions to be made and it involves number of risk and has its own advantages also. But the charm of being a master of you is always above any other form of work. To start your own venture you have to decide on many things. Making a choice of the right project is a difficult decision for an entrepreneur and is an imperative decision. For the reason that rest of the challenges for setting up a business is based on the type of the product and fund to invest. But it is a perception that for owning a business you should have handsome amount of money. Now it is possible with small scale business. An entrepreneur requires a continuous flow of funds not only for setting up of his/ her business, but also for successful operation as well as regular up gradation/ modernization of the industrial unit. To meet this requirement, the Government (both at the Central and State level) has been undertaking several steps like setting up of banks and financial institutions; formulating various policies and schemes, etc. All such measures are specifically focused towards the promotion and development of small and medium enterprises. In both developed and developing countries, the Government is turning to small and medium scale industries and entrepreneurs, as a means of economic development and a veritable means of solving problems. It is a seedbed of innovations, inventions and employment. You do not need to be a genius to run a successful small business, but you do need some help. And that is exactly what this book is, a guide into the stimulating world of small business ownership and management.


Startup India Stand up

Our Prime Minister unveiled a 19-point action plan for start-up enterprises in India. Highlighting the importance of the Standup India Scheme, Hon’ble Prime minister said that the job seeker has to become a job creator. Prime Minister announced that the initiative envisages loans to at least two aspiring entrepreneurs from the Scheduled Castes, Scheduled Tribes, and Women categories. It was also announced that the loan shall be in the ten lakh to one crore rupee range.

A startup India hub will be created as a single point of contact for the entire startup ecosystem to enable knowledge exchange and access to funding. Startup India campaign is based on an action plan aimed at promoting bank financing for start-up ventures to boost entrepreneurship and encourage startups with jobs creation.

Startup India is a flagship initiative of the Government of India, intended to build a strong ecosystem for nurturing innovation and Startups in the country. This will drive sustainable economic growth and generate large scale employment opportunities. The Government, through this initiative aims to empower Startups to grow through innovation and design.



What is Startup India offering to the Entrepreneurs

Stand up India backed up by Department of Financial Services (DFS) intents to bring up Women and SC/ST entrepreneurs. They have planned to support 2.5 lakh borrowers with Bank loans (with at least 2 borrowers in both the category per branch) which can be returned up to seven years.

PM announced that “There will be no income tax on startups’ profits for three years”

PM plans to reduce the involvement of state government in the startups so that entrepreneurs can enjoy freedom.

No tax would be charged on any startup up to three years from the day of its establishment once it has been approved by Incubator.



The book contains the aspects to plan any business strategy step by step. The book explains about business planning, government facilities available for small scale businesses, registration of small scale business, choosing right location, loan related information, availability of raw materials, national fund facility and more aspects that will help start and maintain a new business. Some of the important projects described in the book are book binding, tiffin supply center, supari cutting, typing institute, paper pin production, herbal shampoo, powder production, shuttle cock for badminton, screen printing etc.

The identification of a suitable project within the investment limit of a new entrepreneur is very difficult. The present book strives to meet this specific entrepreneurial need. The book contains processes formulae, brief profiles of various projects which can be started in small investment without much technical knowledge at small place. This is very useful publication for new entrepreneurs, professionals, libraries etc. (This book is available in Hindi Language only)

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स्वरोजगार बेहतर भविष्य का नया विकल्प, अमीर बनने के तरीके, अवसर को तलाशें, आखिर गृह और कुटीर उद्योग कैसे विकसित हो, आधुनिक कुटीर एवं गृह उद्योग, आप नया करोबार आरंभ करने पर विचार कर रहे हैं, उद्योग से सम्बंधित जरुरी जानकारी, औद्योगिक नीति, कम पूंजी के व्यापार, कम पैसे के शुरू करें नए जमाने के ये हिट कारोबार, कम लागत के उद्योग, कम लागत वाले व्यवसाय, कम लागत वाले व्यवसाय व्यापार, कारोबार बढाने के उपाय, कारोबार योजना चुनें, किस वस्तु का व्यापार करें किससे होगा लाभ, कुटीर उद्योग, कुटीर और लघु उद्यमों योजनाएं, कैसे उदयोग लगाये जाये, कौन सा व्यापार करे, कौन सा व्यापार रहेगा आपके लिए फायदेमंद, क्या आप अपना कोई नया व्यवसाय, व्यापारकारोबार, स्वरोजगार, छोटा बिजनेस, उद्योग, शुरु करना चाहते हैं?, क्या आपको आर्थिक स्वतंत्रता चाहिए, क्या व्यापार करे, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों हेतु स्थापना, छोटा कारोबार शुरु करें, छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ, छोटे मगर बड़ी संभावना वाले नए कारोबार, छोटे व्यापार, नया कारोबार, नया बिजनेस आइडिया, नया व्यवसाय शुरू करें और रोजगार पायें, नया व्यापार, परियोजना प्रोफाइल, भारत के लघु उद्योग, भारत में नया कारोबार शुरू करना, रोजगार के अवसर, लघु उद्योग, लघु उद्योग की जानकारी, लघु उद्योग के नाम, लघु उद्योग के बारे, लघु उद्योग माहिती व मार्गदर्शन, लघु उद्योग यादी, लघु उद्योग शुरू करने सम्बन्धी उपयोगी, लघु उद्योग सूची, लघु उद्योगों का वर्गीकरण, लघु उद्योगों की आवश्यकता, लघु उद्योगों के उद्देश्य, लघु उद्योगों के प्रकार, लघु उधोग की जानकारी, लघु एवं कुटीर उद्योग, लघु कुटीर व घरेलू उद्योग परियोजनाएं, व्यवसाय लिस्ट, व्यापार करने संबंधी, व्यापार के प्रकार, सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्ट अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया स्टैंड अप इंडिया, स्टार्टअप क्या है, स्टार्टअप योजना, स्वरोजगार, स्वरोजगार के अवसर, स्वरोज़गार परियोजनाएं

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Contents

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विषय सूची
1. लघु उद्योग शुरू करने सम्बन्धी उपयोगी मार्गदर्शन एवं
उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाएं
लघु उद्योगों का पंजीकरण
उपयुक्त उद्यम का चुनाव कैसे करें
सरकारी सुविधाएं :
अन्य उपयोगी सुविधाओं का वर्णन निम्नलिखित है :
फैक्ट्री के लिए उपयुक्त स्थान की सुविधा
लघु उद्योगों के लिए ऋण की सुविधाएं :
साधारणत : ऋण दो प्रकार के होते हैं :
(क) राज्य सरकारों से मिल सकने वाला ऋण :
ब्याज की दर :
ऋण सम्बन्धी अन्य जानकारी :
(ख) 'राजकीय वित्त निगम अधिनियम' के अन्तर्गत मिल सकने वाला ऋण :
(ग) स्टेट बैंक आफ इण्डिया की ऋण योजना :
(घ) ऋण संबंधी अन्य सरकारी योजना :
1. साधारणत :
2. बीज धन योजना
3. महिला-उद्यम निधि
औद्योगिक रूप में पिछड़े क्षेत्रों को मिलने वाली सुविधाएं
किश्तों पर मशीनें खरीदने की सुविधा :
मशीनरी प्राप्त करने के अन्य श्रोत
कच्चे माल की प्राप्ति
देशी स्रोतों से उपलब्ध कच्चे माल का कोटा कहां-कहां से मिलता है?
प्रशिक्षण सम्बन्धी सुविधाएं
उद्यमिता विकास कार्यक्रम
सिंगल विण्डो सिस्टम
लघु स्तर का उद्योग कैसे लगाएं?
वस्तु का चुनाव
प्रोत्साहन सुविधाएं
संगठन के प्रकार
परियोजना प्रतिवेदन की उपलब्धता
2. औद्योगिक परियोजनाओं हेतु वांछनीयता की कसौटियां
(1) परियोजना-विशेष, जिसके चयन की योजना है, श्रमिक-बहुल है अथवा पूंजी-बहुल
(2) उद्योगों का आकार
(3) विदेशी मुद्रा अर्जन
(4) व्यावसायिक लाभ
(5) राष्ट्रीय आर्थिक लाभ
(6) परियोजनाओं का चुनाव
3. औद्योगिक परियोजनाओं के लिए वित्त का प्रावधान कैसे किया जाये?
घरेलू श्रोतों से इक्वीटी अथवा शेयर कैपिटल बढ़ाना
4. कम्प्यूटर सेन्टर इकाई स्थापित करने की योजना
उत्पादन/सेवा कार्य की प्रक्रिया
उत्पादन/सेवा कार्य का लक्ष्य (वार्षिक)
इकाई के वित्तीय पहलू
इकाई की स्थापना हेतु कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
विविध स्थाई सम्पत्तियों तथा साज सज्जा पर व्यय
कच्चे माल की लागत (प्रतिमाह)
वेतन तथा पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
5. वीडियो मिक्सिंग, डबिंग व टाइटलिंग हेतु इकाई की योजना
इकाई के वित्तीय पहलू
भूमि/भवन की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध व्यय (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
इकाई में होने वाले वार्षिक व्यय
वार्षिक प्राप्तियाँ
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी तथा उपकरण प्रदायकर्ता
6. सुपारी कटिंग हेतु इकाई की योजना
उत्पादन लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
कच्चा माल
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
कर्मचारियों/श्रमिकों का वेतन (प्रतिमाह)
विविध व्यय (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
वार्षिक जॉब वर्क से आय
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरणों के प्रदायकर्ता
7. बुक बाईंडिंग कार्य हेतु इकाई की योजना
इकाई में सेवा कार्य की प्रक्रिया
प्रस्तुत इकाई में सेवा कार्य का लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरण
वेतन तथा पारिश्रमिक व्यय (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल वार्षिक उत्पादन लागत अथवा सेवा कार्य पर होने कुल व्यय
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरणों के प्रदायकर्ता
8. टिफिन सप्लाई केन्द्र स्थापित करने हेतु इकाई की योजनाएं
टिफिन सप्लाई केन्द्र में सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया
प्रस्तुत इकाई में सेवा कार्य का लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
विभिन्न साधन-सुविधाओं की आवश्यकता
विविध स्थाई सम्पतियों की लागत
कच्चे माल की लागत (प्रतिमाह)
कर्मचारियों की आवश्यकता तथा उनको देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
कुल उत्पादन लागत
इकाई की लाभप्रदता
कच्चा माल
9. मारुति वेन किराये पर चलाने हेतु इकाई की योजना
सेवा कार्य की प्रक्रिया
इकाई से अपेक्षित प्राप्तियां (प्रतिवर्ष)
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
इकाई में होने वाली स्थायी लागत का अनुमान :
कार्यशील पूंजी की आवश्यकता
कच्चे माल की लागत (प्रतिमाह)
कर्मचारी तथा कारीगर (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
समय-समय पर की जाने वाली रीपेयरिंग पर खर्च
टायर/ट्यूब पर खर्च
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
इकाई की लाभप्रता
मारुति वेल के मुख्य डीलर
10. टाइपिंग इंस्टीट्यूट की इकाई की योजना,
कुल उत्पादन/सेवा कार्य का लक्ष्य तथा वार्षिक प्राप्तियां
कार्यस्थल की आवश्यकता
इकाई में लगने वाले प्रमुख मशीनरी तथा उपकरण
विविध स्थाई सम्पत्तियों की लागत
कच्चे माल की आवश्यकता (प्रतिमाह)
कर्मचारियों तथा श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी की कुल लागत (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
वार्षिक प्राप्तियां
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरण प्रदायकर्ता
11. पेपर पिन/ऑलपिन के निर्माण की इकाई की योजना
उत्पादन/निर्माण प्रक्रिया
उत्पादन लक्ष्य (वार्षिक)
निर्मित शेड/भवन की आवश्यकता
प्रमुख मशीनरी तथा उपकरणों का विवरण
कच्चे माल की लागत (वार्षिक)
उपयोगिता पर व्यय
कर्मचारियों/श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक (वार्षिक)
विविध खर्चों (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी की आवश्यकता
इकाई की कुल परियोजना लागत
प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत इकाई की स्थापना हेतु
प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
वार्षिक प्राप्तियां
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी प्रदायकर्ता के पते
12. कूलर निर्माण हेतु इकाई की योजना
उत्पादन लक्ष्य
कूलर उत्पादन/निर्माण की प्रक्रिया/विधि
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल/भवन की आवश्यकता
कच्चे माल की आवश्यकता (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
कर्मचारियों/श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
इकाई की कुल परियोजना लागत अथवा इकाई में कुल स्थाई पूंजी निवेश
कुल वार्षिक उत्पादन लागत
कुल वार्षिक प्राप्तियां
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी प्रदायकर्ताओं के पते
13. हर्बल शैम्पू पाउडर (बाल धेने का आयुर्वेदिक पाउडर) के उत्पादन की इकाई की योजना
हर्बल शैम्पू पावडर के उत्पादन की विधि
इकाई का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य
भूमि एवं भवन
मशीनरी तथा उपकरण
कच्चा माल
वेतन एवं पारिश्रमिक
उपयोगिताओं पर व्यय
कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह) कुल स्थाई पूंजी निवेश अथवा कुल परियोजना लागत
पी.एम.आर.वाई. के अंतर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
कुल वार्षिक बिक्री
इकाई की लाभप्रदता
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
विभिन्न वनोपजों (आंवला, हर्रा आदि) की प्राप्ति हेतु
अन्य स्थानीय विक्रेता
मशीनरी प्रदायकर्ता
14. सर्जिकल बेन्डेज बनाने की इकाई की योजना
वार्षिक उत्पादन लक्ष्य
बेन्डेज की निर्माण प्रक्रिया
इकाई के वित्तीय पहलू
भूमि एवं भवन
वार्षिक बिक्री
परियोजना परिकल्पना
मशीनरी एवं उपकरण
कच्चा माल (प्रतिमाह)
कर्मचारियों एवं कारीगरों को वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत अथवा इकाई में कुल स्थाई पूंजी निवेश
प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत इकाई की स्थापना हेतु
प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
उत्पादन लागत (प्रतिवर्ष)
विक्रय से प्राप्तियाँ (प्रतिवर्ष)
अनुमानित लाभप्रदता
मशीन प्रदायकर्ताओं के पते
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
15. साड़ी फाल्स बनाने की इकाई की योजना
उत्पादन लक्ष्य
साड़ी फाल्स की निर्माण प्रक्रिया
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी/उपकरणों का ब्यौरा
कर्मचारियों/कारीगरों को वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
कच्चे माल की अपेक्षित मात्रा व मूल्य (मासिक)
उपयोगिता व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्च (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
वित्तीय स्रोत : प्रधानमंत्री रोजगार योजनान्तर्गत
वार्षिक उत्पादन लागत-
लाभप्रदता विश्लेषण
मशीन प्रदायकर्ताओं के पते
16. बैडमिंटन के लिए शटल कॉक बनाने की इकाई योजना
प्रस्तुत इकाई का उत्पादन लक्ष्य
शटल कॉक के निर्माण की विधि/प्रक्रिया
इकाई के वित्तीय पहलू
इकाई की स्थापना हेतु कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी एवं उपकरणों की आवश्यकता
कर्मचारी एवं कारीगर (प्रतिमाह)
कच्चा माल (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
इकाई की कुल परियोजना लागत अथवा इकाई में कुल स्थाई पूंजी निवेश
प्रधानमंत्री रोजगार योजनांतर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
बिक्री से कुल प्राप्तियां (प्रतिवर्ष)
इकाई की लाभ प्रदत्ता
मशीनरी प्रदायकर्ताओं के पते
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
17. स्क्रीन प्रिंटिंग कार्य हेतु इकाई की योजना
स्क्रीन प्रिंटिंग की इकाई की स्थापना हेतु अत्यधिक कम पूंजी निवेश
की आवश्यकता
कम मात्रा के प्रिंटिंग कार्यों के लिये सर्वाधिक उपयुक्त
सभी प्रकार की वस्तुओं/सतहों पर प्रिंटिंग करना संभव
स्क्रीन प्रिंरटिग के विविध उपयोग
स्टेशनरी वस्तुओं से संबंधित
प्लास्टिक से संबंधित
चीनी मिट्टी अथवा सिरेमिक्स के क्षेत्रा से संबंधित
इलैक्ट्रॉनिक्स तथा इलेक्ट्रिकल से संबंधित
टैक्सटाईल्स के क्षेत्रा से संबंधित
रेग्जीन तथा फोम से संबंधित वस्तुऐं
टीन के क्षेत्रा से संबंधित
कांच से संबंधित
अन्य क्षेत्रों से संबंधित
स्करीन प्रिंरटिंग कार्य में उत्पादन/निर्माण/कार्य करने की प्रक्रिया
डिजाईन तैयार करना
मैटर डी. टी. पी. से कम्पोज करवाना
आटवर्क/डिजाईन तथा कम्पोज किए गए मैटर की नेगेटिव/पाजिटिव बनाना
स्क्रीन पर फिल्म स्थानांतरित करना
आवश्यकता के अनुसार प्रिंट की जाने वाली (कागज अथवा कार्ड)
वस्तु को निर्धरित साईज में काटना।
प्रिंटिंग प्रारंभ करना
छपाई में प्रयुक्त किए जाने वाले विभिन्न कच्चे मालों की विशेषताएँ
छपाई हेतु लगने वाली स्याही
छपाई के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला कपड़ा
एक्सपोजिंग के माध्यम
एक्सपोजिंग फिल्म
स्क्रीन प्रिंरटिग हेतु मशीनें
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल/भवन की आवश्यकता
मशीनरी/उपकरणों की आवश्यकता
इकाई के लिये आवश्यक कच्चा माल (प्रतिमाह)
कर्मचारियों एवं श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी की आवश्यकता (प्रतिमाह)
इकाई की कुल परियोजना लागत अथवा इकाई में कुल स्थाई पूंजी निवेश
प्रधानमंत्री रोजगार योजनांतर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई में कुल वार्षिक प्राप्तियाँ
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरण प्रदायकर्ताओं के पते
18. दुपहिया वाहनों की सर्विसिंग/हेतु इकाई की योजना
प्रस्तुत इकाई में सेवा कार्य का लक्ष्य
वाहनों की रिपेरिंग/सर्विसिंग की प्रक्रिया
इकाई के वित्तीय पहलू
इकाई की स्थापना हेतु कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी/उपकरणों तथा अन्य सहायक स्थाई सम्पत्तियों की आवश्यकता
कच्चे माल की लागत (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
कर्मचारियों/श्रमिकों की आवश्यकता तथा उनको देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विविध खर्चे
इकाई की कुल परियोजना लागत अथवा इकाई में कुल स्थाई पूंजी निवेश
प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित
वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई में किए जाने वाले सेवा कार्य/बिक्री के कुल प्राप्तियां (वार्षिक)
मशीनरी/उपकरण प्रदायकर्ता
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
19. फास्ट फूड रेस्टोरेण्ट स्थापित करने की इकाई की योजना
प्रस्तुत इकाई में उत्पादन लक्ष्य
विपणन व्यवस्था
इकाई के वित्तीय पहलू
मशीनरी/उपकरण तथा अन्य स्थाई संपत्तियाँ
कच्चे माल की लागत (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
कर्मचारियों एवं श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विविध खर्चे
कुल कार्यशील पूंजी की आवश्यकता (प्रतिमाह)
इकाई की कुल परियोजना लागत अथवा इकाई में कुल स्थाई पूंजी निवेश
प्रधानमंत्री रोजगार योजनान्तर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
बिक्री से कुल प्राप्तियां
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरण प्रदायकर्ता
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
20. व्यवसायिक कार्य हेतु फैक्स मशीन की इकाई की योजना
मशीन का उपयोग एक व्यवसाय के रूप में
व्यवसाय की दृष्टि से सही फैक्स मशीन का चुनाव
एक सामान्य व्यवसायी के दृष्टिकोण से व्यावसायिक फैक्स मशीनों
में निम्न विशेषताऐं होनी चाहिये-
प्रस्तुत इकाई में किये जाने वाले सेवा कार्य का लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
इकाई हेतु भवन/दुकान की आवश्यकता
इकाई में लगने वाले प्रमुख मशीनरी तथा उपकरणों का विवरण
कच्चे माल की लागत (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी की आवश्यकता (प्रतिमाह)
इकाई की कुल परियोजना लागत अथवा इकाई में कुल स्थाई पूंजी निवेश
प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित
वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
वार्षिक प्राप्तियां
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी प्रदायकर्ताओं के पते
21. मसालों के उत्पादन हेतु इकाई की योजना
मसालों के उत्पादन की प्रक्रिया
प्रस्तुत इकाई का उत्पादन लक्ष्य (वार्षिक)
इकाई के वित्तीय पहलू
इकाई की स्थापना हेतु कार्यस्थल/भवन की आवश्यकता
मशीनरी एवं उपकरणों की आवश्यकता
इकाई में प्रयुक्त की जाने वाली प्रस्तावित मशीन (पल्वराईजर) की प्रमुख विशेषतायें
हा. पा. की मोटर वाला पल्पराईजर
हा. पा. की मोटर वाला पल्पराईजर
हा. पा. की मोटर वाला पल्पराईजर
हा. पा. की मोटर वाला पल्पराईजर
इकाई में लगने वाले माल की लागत (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
कर्मचारियों एवं श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी की आवश्यकता :
कुल परियोजना लागत :
पी. एम. आर. वाई. के अंतर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत :
कुल वार्षिक आय
मशीनरी उपकरणों के प्रदायकर्ताओं के पते
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
22. चादर (बेड शीट) तकिया कवर निर्माण हेतु इकाई की योजना
उत्पादन क्षमता व उत्पादन से कुल प्राप्तियां
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्य स्थल की आवश्यकता
मशीनरी/उपकरणों की आवश्यकता—
कच्चा माल (प्रतिमाह)
कर्मचारियों/श्रमिकों को वेतन (प्रतिमाह)
उपयोगिता पर व्यय(प्रतिमाह)
विविध व्यय (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत इकाई स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई से वार्षिक आय
इकाई की लाभप्रदता
मशीन/उपकरण निर्माता/प्रदायकर्ता
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
23. हेण्डलूम द्वारा तौलियों के निर्माण हेतु इकाई की योजना
निर्माण प्रक्रिया
उत्पादन लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी/उपकरणों की आवश्यकता
कच्चा माल (प्रतिमाह)
यार्न/धागा
कर्मचारियों/श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध व्यय (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
विविध स्थाई परिसंपत्तियों पर व्यय
कुल परियोजना लागत
इकाई स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
उत्पादन लागत
वार्षिक प्राप्तियां
मशीनरी/उपकरणों के निर्माता/प्रदायकत्र्ता
कच्चा माल निर्माता/प्रदायकर्ता
24. कॉटन टी शर्टस तथा स्पोर्टस शर्टस के निर्माण
उत्पादन लक्ष्य
उत्पादन प्रक्रिया
इकाई के वित्तीय पहलू
इकाई हेतु भवन/कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
कच्चे माल की लागत
उपयोगिता पर व्यय (प्रतिमाह)
कर्मचारियों/श्रमिकों को वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
इकाई की कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरण कर्ता
25. हौजि़यरी वस्त्रों के निर्माण (पुरूषों के अंर्तवस्त्रों) के
निर्माण हेतु इकाई की योजना
उत्पादन लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
कच्चे माल की आवश्यकता
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
वेतन तथा पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विभिन्न खर्चे (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी की लागत (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई की लाभप्रद्रता
मशीनरी/उपकरण प्रदायकर्ताओं के पते
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
26. स्कूटर तथा मोटर साइकिल में लगने वाले क्लच एवं
गीयर वायर्स के निर्माण हेतु इकाई की योजना
उत्पादन प्रक्रिया
इकाई की वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
कच्चे माल की आवश्यकता (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
वेतन तथा पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई की लाभवप्रदता
मशीनरी/उपकरण प्रदायकर्ताओं के पते
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
27. एल्युमीनियम के बर्तन बनाने की इकाई की योजना
निर्माण प्रक्रिया
उत्पादन प्रक्रिया
इकाई की वित्तीय पहलू
भूमि/भवन
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
कच्चा माल (प्रतिमाह)
कर्मचारियों/श्रमिकों का वेतन
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध व्यय (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
अनुमानित वार्षिक प्राप्तियां
लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरणों के प्रदायकर्ता
कच्चा माल प्रदार्यकर्ता
28. चावल से मुरमुरा बनाने की इकाई योजना
तकनीकी जानकारी
उत्पादन लक्ष्य (प्रतिवर्ष)
उत्पादन प्रक्रिया
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्य स्थल की आवश्यकता
मशीनरी एवं उपकरणों की आवश्यकता
कच्चा माल (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी की आवश्यकता (न्यूनतम)
इकाई में कुल पूंजी निवेश
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
उत्पादन लागत (प्रतिवर्ष)
मशीनरी निर्माता
29. दूध से मावा निर्माण हेतु इकाई की योजना
मावे की उत्पादन प्रक्रिया
प्रस्तावित इकाई की उत्पादन क्षमता (प्रतिवर्ष)
इकाई के वित्तीय पहलू
इकाई की योजना हेतु कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
कच्चे माल की लागत (प्रतिमाह)
वेतन तथा पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
प्रधानमंत्री रोजगार योजनांतर्गत इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित
वित्तीय स्रोत
कुल वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई से कुल वार्षिक प्राप्तियां
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरण प्रदायकर्ताओं के पते
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
30. धुलाई साबुन के निर्माण हेतु इकाई की योजना
उत्पादन प्रक्रिया
उत्पादन लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की व्यवस्था
कच्चे माल की लागत
कर्मचारियों/श्रमिकों की आवश्यकता तथा उनको दिया जाना वाला वेतन/
पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह) :-
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कार्यशील पूंजी की कुल लागत (प्रतिमाह)
इकाई की कुल परियोजना
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
कुल उत्पादन लागत (वार्षिक)
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरणों के प्रदायकर्ता
अन्य स्थानीय फैब्रीकेटर/मशीनरी प्रदायकर्ता
मैसर्स कच्चे माल के प्रदार्यकर्ता
31. कपूर की गोली/टिकिया के निर्माण हेतु इकाई की योजना
कपूर की गोली की उत्पादन प्रक्रिया
उत्पादन लक्ष्य तथा अनुमानित प्राप्तियां (प्रतिवर्ष)
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
विविध स्थाई सम्पतियों की लागत
कच्चे माल की आवश्कता वेतन/पारिश्रमिक पर व्यय (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
कुल उत्पादन लागत
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरणों प्रदायकर्ता
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
32. नेल पॉलिश के उत्पादन हेतु इकाई की योजना
उत्पादन लागत तथा अनुमानित प्राप्तियां (प्रति वर्ष)
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्कता
मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता
कच्चे माल की लागत
वेतन तथा पारिश्रामिक पर व्यय (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
कुल उत्पादन लागत (वार्षिक)
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी/उपकरणों के प्रदायकर्ता
कच्चे माल प्रदायकर्ता
33. डिस्टेंपर पेंट बनाने हेतु इकाई की योजना
निर्माण प्रक्रिया
उत्पादन लक्ष्य
इकाई के वित्तीय पहलू
कार्यस्थल की आवश्यकता
मशीनरी/उपकरणों की आवश्यकता
कच्चा माल (प्रतिमाह)
कर्मचारियों/श्रमिकों का वेतन (प्रतिमाह)
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध व्यय (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
विविध स्थाई परिसंपत्तियों की लागत
कुल परियोजना लागत
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
उत्पादन से आय (वार्षिक)
मशीनरी/उपकरणों के निर्माणकर्ता/प्रदायकर्ता के नाम व पते
कच्चा माल निर्माणकर्ता/प्रदायकर्ता के नाम व पते
34. कागज के लिफाफे बनाने की इकाई की योजना
इकाई के वित्तीय पहलू
भूमि तथा भवन की आवश्यकता
इकाई में लगने वाली प्रमुख मशीनरी तथा उपकरण
कच्चे माल की लागत (वार्षिक)
कर्मचारियों/श्रमिकों को देय वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह)
लिफाफों पर प्रिंटिग करवाने की लागत
उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह)
विविध खर्चे (प्रतिमाह)
कुल कार्यशील पूंजी (प्रतिमाह)
इकाई में कुल पूंजी निवेश
इकाई की स्थापना हेतु प्रस्तावित वित्तीय स्रोत
वार्षिक उत्पादन लागत
इकाई की लाभप्रदता
मशीनरी प्रदायकर्ताओं के पते
कच्चे माल के प्रदायकर्ता
35. सौंदर्य व शृंगार प्रसाधन उद्योग
1. एमल्शन
2. पाउडर
3. स्टिक्स
4. केक
5. ऑयल
6. म्युसिलेज
7. जैली
8. सस्पेन्शन
9. पेस्ट
10. सोप
11. सोल्युशन
सौंदर्य प्रसाधनों का वर्गीकरण
(i) चर्म के लिए
(ii) बाल के लिए
(iii) नाखून के लिए
(iv) दांत और मुंह के लिए
(v) बोर्डलाइन तथा किन-रेड प्रोडक्ट्
(क) फेस पाउडर
कच्चा माल
उत्पादन विधि (फेस पाउडर)
सफेद फेस पाउडर बेस के फार्मूले
प्रचारित रंग-समूहों के फेस पाउडर के फार्मूले
कलर बेस फार्मूला
मशीनरी और उपकरण
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : फेस पाउडर
(ख) कोल्ड क्रीम
बनाने की विधि
कोल्ड क्रीम उत्पादन के आधुनिक फार्मूले
कच्चा माल
मशीन और उपकरण
(ग) वैनिशिंग क्रीम (स्नो)
कच्चा माल
स्नो बनाने के फार्मूले
सुगंधि कम्पाउंड का फार्मूला
स्नो में मोती जैसी चमक
स्नो में जिंक ऑक्साइड
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : वैनिशिंग क्रीम (स्नो)
(घ) हैंड क्रीम
भूमिका
उपयोग
मार्केट सर्वेक्षण
हैंड क्रीम उत्पादन का फार्मूला
उत्पादन विधि
हैंड क्रीम उत्पादन का अन्य फार्मूला
कच्चा माल
मशीन और उपकरण
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : हैंड क्रीम
क्लीनसिंग क्रीम
चेहरा साफ करने वाली 'क्लीनसिंग क्रीम'
बनाने की विधि
मशीन एवं उपकरण
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : क्लीनसिंग क्रीम
(च) लिपस्टिक
लिपस्टिक के फार्मूले
बनाने की विधि
सुगन्ध
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : लिपस्टिक निर्माण
अन्य कच्चा माल
मशीन एवं उपकरण
(छ) नेल पॉलिश
कच्चा माल
नेल पॉलिश के फार्मूले
उत्पादन विधि
बनाने की विधि :
सस्ती नेल पॉलिशें :
सस्ती नेल पॉलिश के फार्मूले
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : नेल पॉलिश
मशीन और उपकरण
(ज) केश तेल
आयुवैदिक केश-तेल :
बनाने की विधि :
सुगन्धित ब्राह्मी आंवला केश तेल
उत्पादन विधि
मशीन और उपकरण
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : हेयर ऑयल (आंवला)
(झ) नारियल तेल का शैम्पू
उत्पादन विधि
नारियल तेल के शैम्पू का फार्मूला
शैम्पू बनाने के फार्मूले
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : नारियल के
तेल का शैम्पू
(ञ) हेयर ऐमल्शन, क्रीम व डाई
एमल्शन टाइप हेयर ड्रेसिंग के फार्मूले
बालों को रंगने के लिए आधुनिक 'हेयर डाई' (खिजाब)
हेयर डाई (खिजाब) के फार्मूले
प्रयोग विधि :
ब्राउन खिजाब का फार्मूला
प्रयोग विधि :
एमिडॉल खिजाब का फार्मूला
अन्य उपयोगी संकेत :
खिजाब की परीक्षण विधि :
अन्य चुने हुए फार्मूले :
काली हेयर ड्रायर
मशीनरी एवं उपकरण :
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : ब्लैक हेयर डाई
(ट) हेयर फिक्सर (बालों को बिठाने के लिए)
हेयर-फिक्सर का फार्मूला
निर्माण विधि :
मशीन एवं उपकरण :
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : हेयर फिक्सर
(ठ) टूथ पाउडर
टूथ पाउडर का स्टैन्डर्ड फार्मूला :
टूथ पाउडर का फार्मूला
उत्पादन विधि :
निर्माण विधि :
टूथ पाउडर निर्माण का अन्य फार्मूला
मशीन और उपकरण
(ड) टूथ पेस्ट
पॉलिश करने वाले रचक :
माध्यम :
मीठा करने वाले पदार्थ :
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : टूथ पाउडर
सुगन्धियां :
चिकनाइयां :
कीटाणुनाशक और सुरक्षात्मक पदार्थ:
कार्यशील पदार्थ
टूथपेस्ट को बैलेंस करना
टूथ पेस्ट बनाने का फार्मूला :
टूथ पेस्ट बनाने का अन्य फार्मूला
बनाने की विधि :
मशीन एवं उपकरण
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : टूथ पेस्ट
(ढ) शेविंग क्रीम
कच्चा माल
शेविंग क्रीम के फार्मूले
बु्रश वाली शेविंग क्रीम के फार्मूले
मशीन एवं उपकरण :
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : शेविंग क्रीम
(ण) ऑफ्टर शेव लोशन
प्रस्तावना
ऑफ्टर शेव लोशन निर्माण का फार्मूला
उत्पादन विधि
मशीन एवं उपकरण
ऑफ्टर शेव लोशन बनाने के अन्य फार्मूला
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : ऑफ्टर शेव लोशन
(त) एलम ब्लॉक (फिटकरी)
भूमिका
कच्चा माल
उत्पादन विधि
मशीन एवं उपकरण
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : एलम ब्लॉक (फिटकरी)
(थ) विलोमक
आधुनिक विलोमक क्रीम (फार्मूला)
बनाने की विधि :
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक : विलोमक (Depliatories)
मशीन एवं उपकरण
(द) बच्चों के लिए प्रसाधन
बेबी लोशन
बनाने की विधि :
बेबी क्रीम
बनाने की विधि :
(द्ब1) बेबी पावर्डस
बेबी पाउडर्स के फार्मूले
आय-व्यय योजना (Cost Estimation) वार्षिक :
बेबी पाउडर (Baby Powder)
36. बाल पेन रिफिल के निर्माण हेतु इकाई की योजना
37. सुगर केन्डी बनाने हेतु इकाई की योजना
38. लकड़ी के फोटो फ्रेम्स बनाने हेतु इकाई की योजना
39. बेबी केश अथवा झूला घर स्थापित करने हेतु इकाई की योजना
40. फोटो स्टूडियो स्थापित करने हेतु इकाई की योजना
41. डिटरजेन्ट पाउडर बनाने की इकाई की योजना
42. तरल नील बनाने की इकाई की योजना
43. फिनाईल बनाने की इकाई की योजना
44. आचार निर्माण हेतु इकाई की योजना
45. हेयर पिन्स
46. अगरबत्ती, धूप आदि
47. मोमबत्ती उद्योग
48. पापड़, बड़ियां और चाट मसाला
49. खिलौना और गुड़िया उद्योग
50. इंक इंडस्ट्री
51. सोप एंड क्लीनर्स इंडस्ट्री


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Sample Chapters


(Following is an extract of the content from the book)
Hide Down
कम्प्यूटर सेन्टर इकाई स्थापित करने की योजना
(Project Profile on Computer Centre Unit)
वर्तमान युग में जिस प्रमुख आविष्कार ने भारतीय जीवन को सर्वाधिक आन्दोलित (Revolutionize) किया है, वह है ‘‘कम्प्यूटर‘‘। आज कम्प्यूटर मानवीय जीवन के प्रत्येक पहलू में अपना योगदान दे रहे हैं जिससे न केवल विभिन्न कार्य शीघ्रता से होने लगे हैं बल्कि कार्यों की गुणवत्ता में भी अत्याधिक सुधार हुआ है तथा इससे कार्यालयीन दक्षताओं में भी वृद्धि हुई है।
कम्प्यूटर के विविध तथा विचित्र उपयोगों के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में रोजगार तथा स्वरोजगार के भी अनेकों अवसर सामने आए हैं जो कम्प्यूटर शिक्षा में प्रशिक्षण प्रदान करने से लेकर जॉब वर्क के आधार पर आंकड़ों के प्रक्रियाकरण (data processing) तक तथा कम्प्यूटर्स की सर्विसिंग से लेकर साफ्टवेयर डेव्हेलपमैंट तक फैले हुये हैं । यद्यपि इन समस्त क्षेत्रों में स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं परन्तु एक प्रमुख क्षेत्र जिसमें काफी कम पूंजी निवेश से लाभकारी स्वरोजगार प्राप्त किया जा सकता है वह है- जॉब वर्क आधार पर कम्प्यूटर से आंकड़ो का प्रक्रियाकरण करना (Computerized or Electronic Data Processing on Job Work basis) इस प्रकार की इकाई का प्रत्येक शहर में पर्याप्त संभावनायें देखते हुये प्रस्तुत इकाई में कम्प्यूटर से आंकड़ों के प्रक्रियाकरण अथवा कम्प्यूटराज्ड डाटा प्रोसैसिंग इकाई की स्थापना से संबंधित विवरण प्रस्तुत किये गये हैं ।
कम्प्यूटराज्ड डाटा प्रासैसिंग इकाई के अंतर्गत उद्यमी द्वारा एक सम्पूर्ण कम्प्यूटर इकाई स्थापित की जाती है तथा विभिन्न उपभोक्ताओं से जॉब वर्क आधार पर कार्य प्राप्त करके इसे प्रक्रियाकृत किया जाता है । जो प्रमुख कार्य इस इकाई में किए जा सकते हैं वे हैं-साधारण टाइपिंग कार्य, विभिन्न शासकीय/ अशासकीय कार्यालयों/बैंकों/औद्योगिक प्रतिष्ठानों ने आंकड़े प्राप्त करके उन्हें विश्लेशित तथा प्रक्रियाकृत कर प्रदाय करना, विभिन्न शोध कार्यों में प्रयुक्त होने वाले आंकड़ों को विश्लेशित कर शोध छात्रों को प्रदाय करना तथा थीसिस तैयार करना, प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना आदि । इस प्रकार ऐसे अनेकों उपभोक्ता/उपभोक्ता संस्थान हैं जिनसे उद्यमी को पर्याप्त कार्य मिल सकता है तथा यह इकाई सफलतापूर्वक चल सकती है ।
उत्पादन/सेवा कार्य की प्रक्रिया
डाटा प्रासैसिंग का कार्य एक तकनीकी कार्य है जिसके लिये प्रशिक्षित तथा कुशल आपरेटर की आवश्यकता होती है । इसके अंतर्गत उपभोक्ता द्वारा प्रदाय किये गये आंकड़ों को कम्प्यूटर में फीड किया जाता है तथा ‘‘प्रोग्राम ‘‘ का उपयेाग करते हुए उपभोक्ता की मांग/आवश्यकता के अनुसार आंकड़ों का विश्लेशण करके उसे रिपोर्ट प्रदान कर दी जाती है ।
टिफिन सप्लाई केन्द्र स्थापित करने हेतु इकाई की योजना
(Project profile on the establishment of a Tiffin Supply Centre)
ऐसे युवक तथा युवतियां जो शहरों में अकेले रहते हैं तथा या तो विभिन्न कारखानों/कार्यालयों अथवा अन्य संस्थानों में कार्य करते हैं, या होस्टलों अथवा किराये के भवन लेकर अध्ययन कार्य करते हैं, उनके सामने प्रमुख समस्या होती है-समय पर शुद्ध भोजन प्राप्त करने की । कई बार इनके कार्यस्थल, निवास स्थल होटलों/भोजनालयों से इतने दूर होते हैं कि वे वहां समय पर भोजन करने नहीं जा पाते तथा कई बार इन होटलों/रेस्टोरेंन्टस का खाना इतना अरुचिकर तथा मंहगा होता है कि वे चाह कर भी वे वहां भोजन नहीं कर पाते । ऐसे नौकरीपेशा व्यक्तियों तथा विद्यार्थियों की इस समस्या के आसान तथा सर्वाधिक उपयुक्त हल के रूप में प्रस्तुत हुये हैं - टिफिन सप्लाई केन्द्र जिनके द्वारा विभिन्न कारखानों, कार्यालयों में कार्य कर रहे व्यक्तियों तथा होस्टलों आदि में निवास कर रहे विद्यार्थियों में कार्य स्थल/निवास स्थल पर ही उन्हें भोजन प्रदान करवाने की सेवा उपलब्ध करवाई जाती है ।
नौकरीपेशा व्यक्तियों/विद्यार्थियों के साथ-साथ कई अन्य व्यक्तियों/संस्थाओं द्वारा भी इन केन्द्रों की सेवायें ली जा सकती हैं । उदाहरणार्थ कई बार किन्हीं कार्यालयों द्वारा गोष्ठियों, कान्फ्रेंसों आदि का आयोजन किया जाता है जिनमें भाग लेने वाले सदस्यों को ‘‘वीर्किंग’’ दिया जाता है । इसी प्रकार विभिन्न संस्थाओं/कार्यालयों तथा बैंकों आदि द्वारा आयोजित किये जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले व्यक्तियों के लिए भी टिफिन प्रदान किए जा सकते हैं ।
कुल मिलाकर यदि ऐसे केन्द्रों द्वारा भोजन की गुणवत्ता तथा शुद्धता का ध्यान रखते हुये टिफिन प्रदान करने का कार्य किया जाए तो ये केन्द्र काफी सफलतापूर्वक कार्य कर सकते हैं तथा इनसे न केवल कर्मचारियों/विद्यार्थियों की शुद्ध भोजन प्राप्त करने की समस्या समाप्त हो सकती है बल्कि अनेकों महानगरों के साथ-साथ छोटे-छोटे शहरों में भी ऐसे टिफिन सप्लाई केन्द्र सफल हो सकते हैं ।
टिफिन सप्लाई केन्द्र में सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया
टिफिन सप्लाई केन्द्रों में मुख्यतया एक ही स्थान पर खाना तैयार करके शहर के विभिन्न भागों में कार्यरत व्यक्तियों/विद्यार्थियों को उनके कार्यस्थल तथा/अथवा निवास स्थल पर प्रदाय किया जाता है । क्योंकि वर्तमान में भोजन रखने हेतु हॉट केसेस प्रचलन में है अतः इनमें भोजन ताजा तथा गर्म रहता है । उपभोक्ताओं द्वारा भी इस भोजन को काफी पसंद किया जाता है । ऐसे उपभोक्ताओं के संदर्भ में जो इन केन्द्रों से लंच तथा डिनर दोनों सेवायें लेना चाहते हैं उन्हें लंच के संदर्भ में दोपहर को टिफिन प्रदाय कर दिये जाते हैं तथा जब प्रदायकर्ता शाम को डिनर हेतु टिफिन प्रदाय करने जाता है तो वह लंच वाला खानी टिफिन वापिस ले आता है । इस प्रकार यह चक्र निरंतर चलता रहता है । प्रायः एक ही व्यक्ति द्वारा सभी स्थानों पर टिफिन सप्लाई किए जाते हैं जो कि साईकिल, स्कूटर अथवा मोटर साइकिल पर एक साथ टिफिन ले जाकर विभिन्न स्थानों पर इन्हें वितरित कर देते हैं ।
प्रस्तुत इकाई में सेवा कार्य का लक्ष्य
प्रस्तुत योजना के अनुमानों के अनुसार प्रतिमाह 55 व्यक्ति इस टिफिन सप्लाई केन्द्र की सेवाएं (लंच तथा डिनर दोनों) लेंगे । ऐसा भी हो सकता है कि कुछ व्यक्ति केवल लंच ही लेना चाहें तथा कुछ व्यक्ति केवल डिनर-परन्तु अनुमानतः प्रतिदिन औसतन 110 व्यक्तियों (55 लंच + 55 डिनर) द्वारा इस केन्द्र की सेवाएं ली जाएंगी । क्योंकि कई टिफिन सप्लाई केन्द्रों द्वारा भोजन से अतिरिक्त टिफिन सप्लाई का भी प्रतिदिन 1 या 2 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है परन्तु प्रस्तुत इकाई में ये सेवा निःशुल्क प्रदान की जाएगी । इस प्रकार इस इकाई में 55 व्यक्तियों को मासिक आधार पर टिफिन प्रदान किए जाने का लक्ष्य है जिनसे 600 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह की दर से शुल्क लिया जायेगा तथा इससे वर्श भर में कुल 396000 रुपये की प्राप्तियां होंगी ।
कूलर निर्माण हेतु इकाई की योजना
(Project profile for the manufacture of Coolers)
लगभग एक दशक पूर्व तक आराम तथा सुख सुविधा की वस्तु समझे जाने वाले कूलर्स आज प्रत्येक कार्यालय/दुकान के लिये अनिवार्य आवश्यकता की वस्तु बन चुके हैं । देश के इस भाग (मध्य प्रदेष) में गर्मी का मौसम काफी लंबा (फरवरी से सितंबर-अक्टूबर तक) होने की वजह से तथा अप्रैल से जून के मध्य तक अत्यधिक गर्मी पड़ने की वजह से कूलर्स का उपयोग तीव्र गति से बढ़ा है ।
यद्यपि प्रारंभ में मध्य प्रदेश के अधिकतर उद्यमी कूलर के विभिन्न पार्टस दिल्ली से लाकर उन्हें यहां असेम्बल कर विक्रय करने का कार्य करते थे परन्तु कूलर्स की उत्तरोत्तर मांग बढ़ने, उपभोक्ताओं द्वारा विभिन्न विषिश्टियों के कूलर्स की मांग करने तथा स्थानीय रूप से कूलर्स उत्पदित करना ज्यादा लाभकारी प्रतीत होने के कारण पिछले कुछ वर्षों से कूलर्स के निर्माण की अनेकों इकाईयां मध्यप्रदेश में स्थापित हुई हैं । यद्यपि किन्हीं उच्च स्तरीय परिवारों द्वारा ऊंची क्वालिटी के तथा महंगे कूलर्स का उपयोग किया जाता है, परन्तु प्रायः सामान्य जनता द्वारा स्थानीय तौर पर उत्पादित कूलर्स का उपयोग ही किया जाता है । यद्यपि इस इकाई को ‘‘सीजनल‘‘ कहा जाता है परन्तु फिर भी उद्यमी को इन उत्पादों हेतु मार्च से लेकर सितम्बर-अक्टूबर तक पर्याप्त बाजार प्राप्त हो सकता है जो अप्रैल के महीने में अपनी चरम सीमा पर होता है । इस प्रकार इस इकाई में अक्टूबर से ही कार्य करना (कूलर निर्मित करना) प्रारंभ हो जाता है (ताकि उद्यमी इन्हें मार्च तथा अप्रैल तक बाजार मे प्रस्तुत कर सके) तथापि यह जून तक चलता रहता है। शेष समय (ऑफ सीजन) में उद्यमी इन मशीनों से शीट मैटल संबंधित अन्य कार्य भी कर सकता है । खुले बाजार के साथ-साथ शासकीय खरीद कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के माध्यम से भी प्रतिवर्ष काफी मात्रा में कूलर्स का क्रय किया जाता है । निःसंदेह यदि उद्यमी उच्च गुणवत्तापूर्ण कूलर्स का उत्पादन करें, कूलर्स के निर्माण में अच्छे किट्स (पंप आदि) का उपयोग करें तथा, विक्री उपरांत अच्छी तथा निरंतर सेवा का आश्वासन दें, तो इसे इस उत्पाद हेतु काफी अच्छा बाजार प्राप्त हो सकता है । यदि कोई उद्यमी इस उद्योग की स्थापना करना चाहता है तो उसे भोपाल स्थित कबाड़खाना क्षेत्र का भ्रमण कर सम्बन्धित सभी जानकारी यहां से प्राप्त करनी चाहिये । यहां पर बहुत सारी इकाई कूलर असेम्बलिंग का कार्य करती है ।
उत्पादन लक्ष्य : इस इकाई में प्रतिवर्श 300 कूलर्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
कूलर उत्पादन/निर्माण की प्रक्रिया/विधि : कूलर्स के निर्माण की प्रक्रिया में सर्वप्रथम स्टील की शीट्स की निश्चित साईजों में कटिंग की जाती है । इसके उपरांत इस शीट की जाली कटिंग मशीन से बनाई जाती है । इसके उपरांत शीट को मोड़कर तथा बैन्ड करके कूलर की बॉडी बनाई जाती है । इस कूलर बॉडी में पंखा, खस तथा पंप फिट कर दिया जाता है । इस निर्मित उत्पाद का फिर परीक्षण किया जाता है तथा अंततः इसे स्प्रे पेन्टिंग करके विपणन हेतु प्रस्तुत कर दिया जाता है ।
हर्बल शैम्पू पाउडर (बाल धोने का आयुर्वेदिक पाउडर) के उत्पादन की इकाई की योजना
(Project profile for the Preparation of Herbal shampoo powder an Ayurvedic Preparation in Powder for the Washing of Hair)
वर्तमान समय में समाज के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं में लम्बे, घन तथा चमकदार बालों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है । इस शौक को पूरा करने के लिए विभिन्न हेयर शैम्पू तथा साबुन का उपयेग किया जाता है, जिसके प्रचलन तथा व्यापक बाजार का अंदाज इस संदर्भ में प्रसारित किए जाने वाले विज्ञापनों से सहज ही लगाया जा सकता है ।
यद्यपि भारतीय बाजार में असंख्य हेयर शैम्पू उपलब्ध हैं, जैसे-हेलो, क्लीनिक, वेलनेट, चिक एनसिल्क, लैक्में, टिआरा, फॉ आदि परन्तु इनमें से अधिकतर उत्पाद सिन्थेटिक अथवा रसायन-आधारित (कैमिकल्स बेस्ड) हैं जिनसे होने वाली संभावित हानियों (साइड इफेक्ट) की वजह से उपभोक्ताओं का इनके प्रति मोहभंग होता जा रहा है। यही वजह है कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में सिन्थेटिक तथा रसायन आधारित उत्पादों का स्थान देशीय /आयुर्वेदिक उत्पाद लेते जा रहें हैं । भारतीय बाजार में जिस प्रकार एलोपैथिक दवाइयों की जगह आयुर्वेदिक दवाईयों की लोकप्रियता बढ़ी है उससे प्रोत्साहित होकर अन्य उपभोक्ता वस्तुओं विशेषकर सौन्दर्य प्रसाधनों के क्षेत्र में भी अनेकों आयुर्वेदिक उत्पाद बाजार में प्रस्तुत हुए हैं तथा उन्हें आशानुरूप लोकप्रियता भी प्राप्त हुई है । देशभर में महिलाओं हेतु संचालित किए जाने वाले ब्यूटी पार्लर इस बात में विशेष गौरव महसूस करते हैं कि वे हर्बल उत्पादों का उपयोग करते हैं अथव उनका ब्यूटी पार्लर ‘‘हर्बल पद्धति‘‘ पर आधारित है । सौन्दर्य प्रसाधनों के क्षेत्र में प्रस्तुत किए गए विभिन्न हर्बल उत्पादों जैसे आर्युनीता, सिल्केषा, प्यूमा, केशकल्प, अर्निका, सौन्दर्य (सागर) आदि अत्याधिक लोकप्रियता अर्जित करते जा रहे हैं इनका बाजार निरन्तर बढ़ता जा रहा है । इन उत्पादों के निर्माण की विधि अपेक्षाकृत आसान होने की वजह से उनसे संबंधित अनेकों इकाईयां स्थापित की जा सकती हैं । मध्यप्रदेश के विभिन्न भागों में जहां काफी मात्रा में जंगल पाए जाते हैं तथा इन उत्पादों के निर्माण में लगने वाले अवयव काफी मात्रा में उपलब्ध हैं, इन उत्पादों का निर्माण काफी सस्ती दरों पर किया जा सकता है । अन्य स्थानों पर भी इन उत्पादों से संबंधित इकाईयां सफलतापूर्वक स्थापित की जा सकती हैं ।
प्रस्तुत इकाई में विभिन्न हर्बल तथा अन्य अवयवों से बाल धोने का आयुर्वेदिक पाउडर (हर्बल शैम्पू पाउडर) बनाना प्रस्तावित है ।
इस इकाई हेतु प्रस्तावित मशीनों का उपयोग करके तथा इसमें लगने वाले कच्चे माल में से किन्हीं अवयवों का उपयोग करके हर्बल फेस पाउडर तथा अन्य उत्पाद भी बनाये जा सकते हैं ।
हर्बल शैम्पू पाउडर बनाने के लिए उसके विभिन्न अवयवों को एक निश्चित फार्मूले के अनुसार निश्चित अनुपात में पीसा एवं मिश्रित किया जाता है । वर्तमान में इस उत्पाद हेतु प्रचलित फार्मुले में विभिन्न अवयवों का निर्धारित अनुपात निम्नानुसार है -
1. त्रिफला चूर्ण - 10 प्रतिशत
2. रीठा - 10 प्रतिशत
3. शिकाकाई - 10 प्रतिशत
4. नीम की छाल का चूर्ण - 10 प्रतिशत
5. फोमिंग एजेन्ट - 4.5 प्रतिशत
(झाग हेतु)
6. सुगन्धित द्रव्य - 1.5 प्रतिशत
7. मुलतानी मिट्टी - 61.5 प्रतिशत

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बैडमिंटन के लिए शटल कॉक बनाने की इकाई योजना
(Project profile for the manufacture of Badminton shuttle cocks)
बैडमिंटन भारत का एक लोकप्रिाय खेल है जो कि देश के लगभग सभी भागों में प्रायः सभी उम्र के व्यक्तियों द्वारा समान रूप से पसंद किया जाता है । यह खेल खुले मैदान तथा लॉन एवं घरो में भी खेला जा सकता है तथा यही इसकी लोकप्रियता की प्रमुख वजह है । क्योंकि उत्तरोत्तर होते जा रहे शहरीकरण तथा अत्याधिक भागदौड़ पूर्ण जीवन के कारण नागरिकों के लिए यह संभव नहीं रह गया है कि वे खुले मैदानी खेलों हेतु समय निकाल सकें । स्कूली लड़कियों तथा वृद्ध स्त्री-पुरूषों द्वारा भी यह खेल अत्याधिक पसंद किया जाता है ।
बैडमिंटल के खेल का एक महत्वपूर्ण अंग है - शटल कॉक । शटल कॉक विभिन्न गुणवत्ताओं के अनुसार (सस्ते/महंगे) बनाए जाते हैं । ऊंची गुणवत्ता के शटल कॉक में बतख अथवा गूज के पंखों का उपयोग किया जाता है जो कि कश्मीर तथा पश्चिमी बंगाल से उपलब्ध होते हैं, जबकि सस्ती क्वालिटी के शटल कॉक बनाने हेतु मुर्गी के पंखों का उपयोग किया जाता है । यह निःसन्देह बड़े दुख की बात है कि कच्चा माल (मुर्गी के पंख) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने के, तथा काफी मात्रा में शटल कॉक की खपत होने के बावजूद हमारे प्रदेश में इस तरह की बहुत कम इकाईयां हैं तथा वर्तमान में अधिकांश माल जालंधर, दिल्ली, मेरठ आदि से ही आता है । इसके साथ-साथ इन उत्पादनों की निर्माण प्रक्रिया इतनी सरल है कि इस प्रकार की इकाइयां घर-घर स्थापित की जा सकती है ।
प्रस्तुत इकाई का उत्पादन लक्ष्य : प्रस्तुत इकाई में प्रतिवर्श 13800 दर्जन शटल कॉक बनाने का लक्ष्य है । इनमें से 2400 दर्जन शटल कॉक प्रथम क्वालिटी के होंगे जिनका बिक्री मूल्य लगभग 85/रु. प्रति दर्जन होगा । जबकि 11400 दर्जन शटल कॉक सैकिण्ड क्वालिटी के होंगे जिनका बिक्री मूल्य लगभग 80 रु. प्रति दर्जन होगा । कुल मिलाकर दोनों क्वालिटी की 13800 दर्जन शटल कॉक की बिक्री से कुल 11,16,000/- रु. की प्राप्तियां होना अनुमानित है ।
शटल कॉक के निर्माण की विधि/प्रक्रिया : शटल कॉक बनाने के लिये लगने वाला प्रमुख कच्चा माल है बॉटम कार्क, मूर्गी के पर, लेदर कैप (छोटी), धागा एवं रिबन बॉटम कार्क, विदेशी कार्क के विशिष्ट आकार के टुकड़े होते हैं जो कटे हुये, अर्धगोले की तरह दिखते हैं। यह कार्क लकड़ी यद्यपि पुर्तगाल और स्पेन से आती है, लेकिन दिल्ली, बंबई, जालंधर, मेरठ के बाजारों में भी आसानी से मिलती है । हैन्ड ड्रिल नामक छोटी मशीन से बाॅटम कार्क के तल (सपाट) पर 16 छेद सही अंतर रखकर बनाये जाते हैं । पोल्ट्री फार्म से प्राप्त मुर्गी के पंखों को तरल साबुन, नील से धोकर सुखाया जाता है । छोटी हैन्ड प्रेस द्वारा इन पंखों को शटल की आकार में एक सरीका काटा जाता है । इन पंखों को बॉटम कार्क के सुराखों में गोंद द्वारा बिठाया जाता है, और शटल कॉक आकार ले लेता है । मर्सराईज्ड या रेशमी धागे से इन परों को बीच में गोलाकार बांधकर मजबूत बनाया जाता है और पंखों में हल्का गोंद लगाकर उन्हें कड़क बनाते हैं । कार्क बॉटम का सिरा रिबन से ढ़ाककर शटल कॉक तैयार होता है । इन तैयार शटल कॉक को तोलकर वनज के अनुसार 68-70 और 75-80 ग्राम के अनुसार छांटकर कार्डबोर्ड के गोल डिब्बों में 12-12 की संख्या में भरकर पैक किया जाता है । शटल कॉक के विक्रय में 75 प्रतिषत हिस्सा सस्ते कॉक्स का ही होता है ।

कॉटन टी शर्टस तथा स्पोर्टस शर्टस के निर्माण
(Project profile on Cotton T-Shirts and Sports Shirts)
कॉटल निटेड टी-शर्टस तथा शर्टस प्रत्येक लगभग व्यक्ति द्वारा पहने जाते हैं । विशेषकर गर्मियों तथा बरसात में इनका प्रचलन काफी बढ़ जाता है । यद्यपि युवाओं द्वारा टी-शर्टस एक प्रमुख पहनावे के रूप में पहने जाते हैं, अन्य व्यक्तियों द्वारा भी ’’कैजुअल वेयर्स’’ के रूप में इनका काफी प्रयोग किया जाता है ।
समाज के लगभग सभी वर्गों द्वारा उत्पाद का उपयेाग करने के कारण इस उत्पाद के विपणन में किसी प्रकार की कठिनाई प्रतीत नहीं होती तथा लगभग प्रत्येक शहर के फुटपाथ से लेकर अच्छे शौ रूम्स में उत्पादों की बिक्री होते देखी जा सकती है । टी- शर्टस की निर्माण प्रक्रिया भी काफी सरल है । तथा यदि उद्यमी फैब्रिक का चयन आसानी से से करे तो तो अच्छी गुणवत्ता के टी- शर्टस का उत्पादन किया जा सकता है । इसी इकाई में बनियान, बाबा सूट, स्पोटर्स तथा नैपकिन आदि भी बनाए जा सकते है ।
उत्पादन लक्ष्य : प्रस्तुत इकाई में वर्षभर मे विभिन्न साइजों की कुल 9200 टी बनाये जाने का लक्ष्य है । अनुमानतः एक किलोग्राम कॉटन निटेड फैब्रिक में 4 टी-शर्टस बनाई जाएंगी । प्रति टी-शर्ट औसतन 85/- रु की दर में बिक्री से वर्ष मे इस इकाई से कुल 782000 रु की प्राप्तियां होना अनुमानित है ।
उत्पादन प्रक्रिया : टी-शर्टस की उत्पादन प्रक्रिया में सर्वप्रथम बढ़िया कॉटन का ब्लीड सूती कपड़ा बजार से खरीदा जाता है । तथा उसकी वांछित साइज में कटाई की जाती है । कपड़े के इन कटे हुए टुकड़ों को ओवर लॉक तथा चेन मशीनों की सहायता से सिला जाता है । तथा फ्लेट लॉक मशीन से टी-शर्टस का कालर/गला तथा जेब सिला जाता है । इसके उपरांत इन सिली हुई टी-शर्टस को प्रैस करके तथा पैकिंग करके विपणन हेतु प्रस्तुत कर दिया जाता है ।
धुलाई साबुन के निर्माण हेतु इकाई की योजना
(Project Profile on Laundry Soap, Cake, Bar, Chips and Powder)
धुलाई का साबुन ऐसी अनिवार्य आवश्यकता है जिसका उपयोग लगभग प्रत्येक परिवार तथा लांड्री में किया जाता है । इस संदर्भ में यद्यपि शहरी क्षेत्रों तथा उच्च/उच्च मध्यम आर्थिक स्तर के परिवारों द्वारा सिंथेटिक साबुनों तथा डिटर्जेन्ट पाउडरों का उपयोग किया जाता है । ग्रामीण क्षेत्रों में तथा आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत पिछडे़ परिवारों द्वारा अभी भी परम्परागत धुलाई का साबुन ही उपयोग में लाया जाता है । तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इसका काफी विस्तृत बाजार है । इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा इस प्रकार के धुलाई साबुनों का निर्माण करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जाता है । तथा यदि साबुन निर्माण की कोई इकाई ग्रामीण क्षेत्रों में (जिनकी संख्या 2000 से कम हो) स्थापित की जाये, तो ऐसी इकाइयों को जीवन पर्यन्त विक्रय कर से शत प्रतिशत छूट प्राप्त करने की पात्रता होती है । अतः यदि ग्रामीण क्षेत्रों में साबुन निर्माण की इकाईयां स्थापित की जाये तथा उनमें गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाये जाये तो ऐसी इकाइयां काफी सफलतापूर्वक चल सकती है ।
उत्पादन प्रक्रिया : साबुन बनाने की प्रक्रिया काफी सरल तथा इस संदर्भ में परम्परागत रूप से तीन विधियां प्रचलन में है । यथा ठंडी प्रक्रिया, कम उबालकर साबुन बनाने की प्रक्रिया (सैम बॉइल्ड प्रोसैस) उपयोग मे लाई जायेग जिसके अंतर्गत सर्वप्रथम पानी को गर्म किया जाता है तथा उसके कास्टिक सोडा मिलाया जाता है । इसके उपरांत इसमें सोडियम सिलीकेट मिलाया जाता है । सोडियम सिलिकेट मिलाने के बाद इसे 2 - 2.5 घंटे तक उबाला जाता है । तथा तदुपरांत इसमे हार्ड आइल अथवा खाद्य तेलों की गाद अथवा अवशेष भी मिलाया जा सकता है । इस घोल को 60 से 70 अंश सेटीग्रेड तक गर्म किया जाता है । तथा इसके उपरांत इसमें रंग तथा परफ्यूम आदि मिलाए जाते हैं । इसके बाद इस घोल को सांचों में डाला जाता है जहां यह ठंडा हो जाता है । प्रायः इस घोल को ठंडा होने के लिए सर्दियों में छः घंटे तथा गर्मियों में 2 दिन तक का समय लग जाता है । इसके उपरांत इस ठंडे हुए मिश्रण की साईजिंग की जाती है । तथा स्टेम्पिंग (इसके ऊपर इकाई के ब्रांड नाम का ठप्पा लगाना) करने के उपरांत इसकी पैकिंग करके विपणन हेतु प्रस्तुत कर दिया जाता है । उच्च गुणवत्ता पूर्ण साबुन के निर्माण के लिए आवश्यक है कि मिश्रण में कम मात्रा में सोडियम सिलीकेट डाला जाये ।
कपूर की गोली/टिकिया के निर्माण हेतु इकाई की योजना
(Project Profile on Camphor Tablet Manufacturing Unit)
कपूर की गोली/टिकिया का उपयोग मुख्यता पूजा अर्चना हेतु किया जाता है । प्रत्येक धर्म के लोगों द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों के समय कपूर की टिकिया/गोली प्रयुक्त की जाती है । जिसके कारण इसकी काफी मांग रहती है ।
प्रायः कपूर की गोली/टिकिया 1 से.मी. से 2 से.मी. तक के चैरस आकारों में मिलती है । पूर्व में कपूर का उत्पादन औषधीय पौधों के सत्व से किया जाता था । तथा इससे कई प्रकार की आयुर्वेदिक इवाईयां भी बनाई जाती थी परन्तु कालांतर में यह उत्पाद संष्लेशित (सिन्थेटिक) तत्वों से बनाया जाने लगा । वर्तमान में भी विभिन्न रासायनिक यौगिकों सम्मिश्रणों से कपूर के पाउडर का उत्पादन किया जाता है । पूजा अर्जना हेतु प्रयुक्त होने वाली टिकिया इसी पाउडर से बनाई जाती है । यद्यपि मध्य प्रदेष, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेष आदि प्रदेषों में कपूर की गोलियां/टिकिया की काफी खपत है । परंतु उनके निर्माण से संबंधित इकाइयां वहां स्थापित नहीं हो पाई हैं । इसका प्रमुख कारण था इस इकाई हेतु प्रयुक्त कच्चा माल (कपूर का पाउडर) न उपलब्ध होना जिसके अभाव में अत्यंत सरल इकाई होने के बावजूद भी कपूर की टिकिया के निर्माण की इकाईयां मध्यप्रदेष तथा आसपास के प्रदेशों में स्थापित नहीं हो पाई । यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि हाल में ही मध्यप्रदेश में रॉबीन कैम्फर एण्ड आर्गेनिक्स प्रा. लि. भोपाल के नाम से कपूर पाउडर के निर्माण के क्षेत्र में एक मध्यमस्तरीय इकाई स्थापित हुई है जो कि न केवल प्रदेष के उद्यमियों को सुलभ दरों पर कपूर का पाउडर देने हेतु तैयार है । बल्कि फ्रेचाइज आधार पर उनके उत्पाद ‘‘कपूर की गोली’’ का विपणन करने हेतु तैयार है । प्रदेष के उद्यमियों के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है क्योंकि एक तो यह इकाई काफी कम पूँजी निवेश से स्थापित की जा सकती है । दूसरे इनमें ज्यादा पूंजी निवेश की भी आवश्यकता नहीं है । तीसरे कच्चे माल की भी समस्या नहीं है तथा चैथे इसके विपणन के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध है । अतः मध्यप्रदेश तथा इसके आसपास के प्रदेशों में कपूर की गोली के निर्माण की इकाइयां सफलतापूर्वक चल सकती है ।
सुगर केन्डी बनाने हेतु इकाई की योजना
(Project Profile on the production of Sugar Candy)
सुगर केन्डी, जिसे स्थानीय भाशा में प्रायः ‘‘बुढ़िया के बाल’’ के नाम से जाना जाता है, बच्चों द्वारा अत्याधिक पसंद की जाती है । प्रत्येक स्कूल के मध्यावकाश में हॉकर्स को स्कूल की सीमा के बाहर सुगर केन्डी बेचते देखा जा सकता है । मेले, हाट, बाजार, प्रदर्शनियों आदि के समय भी सुगर केन्डी की काफी मात्रा में बिक्री होती है । प्रायः यह रूई जैसे बाल (Ball) बनाकर बेची जाती है। स्थानीय मांग को देखते हुए यह इकाई किसी भी बड़े गांव अथवा कस्बे में स्थापित की जा सकती है । यद्यपि कई बार विभिन्न मेलों/हाटों/प्रदर्षनियों आदि में इस इकाई का स्टाल भी लगाया जा सकता है । (जहां से उसी समय मांग के अनुसार तैयार करके यह प्रदाय की जाती है । परंतु घर अथवा दुकान पर भी यह इकाई स्थापित की जा सकती है । तथा इसका उत्पाद स्कूलों/बाजारों आदि मे विक्रय किया जा सकता है । कम पूंजी निवेश से स्थापित किया जा सकने वाली इस सरल इकाई हेतु प्रत्येक कस्बे में पर्याप्त बाजार उपलब्ध हो सकता है ।
उत्पादन प्रक्रिया: सुगर केन्डी की उत्पादन प्रक्रिय अत्यंत सरल है, इस संदर्भ में शक्कर में खाद्य रंग मिलाकर किसी बर्तन या डिब्बे में रखा जाता है । फिर मशीन चालू करके चीनी को मशीन के मध्यभाग में (निश्चित मात्रा में) थोड़ा थोड़ा डाला जाता है । इससे जालीनुमा केन्डी बनने लगती है । जिसे बांस की तीली में लपेट कर प्लास्टिक बैग में भर दिया जाता है । एक किलो शक्कर से लगभग 500 ग्राम केन्डी बनती है ।

बेबी क्रेश अथवा झूला घर स्थापित करने हेतु इकाई की योजना
(Project profile on establishing a Baby Creache unit)
वर्तमान समाज में अधिकांश पालकों के नौकरी पेशा होने के कारण तथा एकल परिवारों (Single Families) के प्रचलन के कारण छोटे छोटे बच्चों के पालन तथा देखरेख की समस्या एक प्रमुख समस्या के रूप में उभरी है । अपने कैरियर के प्रति सचेत महिलाएं कार्यालय से ज्यादा दिनों तक छुट्टी भी नहीं ले सकती तथा या तो घर में बच्चों को रखने वाली नौकरानियां मिलती नहीं हैं। तथा मिलें भी तो उनकी मांगे पूरी करना प्रत्येक पालक के लिए संभव नहीं हो पाता है । दूसरे वे कब छुट्टी लेकर बैठ जाएं इस बात का भी कोई भरोसा नहीं होता जिससे कामकाजी महिलाओं को बहुत परेशानी होती है ।
संभवतया इसी वस्तु स्थिति का परिणाम है - बेबी क्रेश अथवा चाइन्ड केयर सेंटर्स जहां ऐसी कामकाजी महिलाएं दिनभर अपने बच्चों को छोड़ जाती हैं तथा कार्यालय से आते समय वापिस ले जाती हैं । बच्चों की देखरेख के लिए ऐसे केन्द्र काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं तथा महानगरों से प्रारंभ होकर बडे़ शहरों में तथा अब तो छोटे छोटे शहरों एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में भी बेबी क्रेश खुलते जा रहे हैं । इन्हें आधुनिक समाज की अनिवार्य आवश्यकता कहा जाए तो षायद यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। यहां यह कहना अनुचित नहीं होगा कि वर्तमान में स्थापित अधिकांष पालक केवल मजबूरी वष अपने बच्चों को यहां भेजते हैं इसक प्रमुख् वजह यह है कि अधिकांश बेबी क्रेश का उद्देष्य केवल बच्चों का समय पास करवाना होता है । तथा बच्चों के विकास पर ध्यान न देकर उन्हें सुलाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि यदि ऐसे क्रेश में बच्चों के विकास तथा मनोरंजन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो न केवल पालक खुशी खुशी अपने बच्चों को यहां छोड़ना चाहेंगे बल्कि इसके लिए ज्यादा शुल्क देने के लिए भी तैयार रहेंगे ।
यद्यपि बेबी क्रेश की इकाई कोई भी (स्त्री/पुरूश) स्थापित कर सकता है । परंतु इस प्रकार की इकाई के संचालन में महिलायें ज्यादा सफल हो सकती हैं । इस प्रकार की इकाई के संचालन के लिए उद्यमी/महिला में ममतामय हृदय, सह हृदय, बाल मनोविज्ञान का ज्ञान तथा बच्चों की बीमारियों का सामान्य ज्ञान होना वांछित होगा । वस्तुतः यदि व्यवसाय के साथ साथ सेवाभाव को भी सम्मिलित करके ऐसी इकाई स्थापित की जाए तो न केवल व्यवसायिक रूप से काफी सफल सिद्ध हो सकती है बल्कि इसे समाज में काफी प्रतिष्ठा भी मिल सकती है ।
प्रस्तुत इकाई के संचालन की प्रक्रिया: बेबी क्रेश मे प्रायः एक महीने की आयु से लेकर 10 साल तक के बच्चे आते हैं । जाहिर है कि विभिन्न आयु समूहों के बच्चों के लिए बेबी क्रेश में दी जाने वाली सेवाएं भी अलग अलग प्रकार की होगी । इस संदर्भ में जहां तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों के संदर्भ में दी जाने वाली सेवाएं, उन्हें साफ सुथरा, नहलाने धुलाने, दूध इत्यादि पिलाने से संबंधित होगी, वहीं बड़े बच्चों के संदर्भ में उनको मनोरंजन करने, उन्हें पढ़ाने लिखाने, खाना खिलाने आदि सेवाएं दी जायेगी । प्रायः दूध अथवा खाना परोसने तथा अपनी देखरेख में खिलाने का कार्य किया जाता है । परंतु यदि पालक चाहें तो क्रेश में ये सेवाएं भी प्रदान की जा सकती हैं । क्रेश में बच्चों के आने का समय भी अलग अलग रहता है - कई पालक बच्चों को प्रातः 7 बजे से षाम 6 बजे तक भेजते हैं जबकि कई 10 बजे से षाम 5 बजे (जैसे उनका कार्यालयीन समय हो) तक । इसके अतिरिक्त कई बच्चे स्कूल से आने के बाद अपने पालकों के घर आने का समय क्रेश में गुजारते हैं । अतः बच्चों को क्रेश में आने का समय अलग अलग हो सकता है । जो कि मुख्यता उनको साफ सुथरा रखने, खिलाने/पिलाने, पढ़ाने तथा उनका मनोरंजन करने आदि जैसे उद्देश्यों पर केन्द्रित हो सकता है ।
मोमबत्ती उद्योग
Candle Manufacturing
यदि आप किसी ऐसे घरेलू उद्योग को शुरू करना चाहते हैं जिसमें आप अपना कुछ ही समय देना चाहते हैं, साथ ही यह भी चाहते हैं कि परिवार के दूसरे लोग भी इसे कर सकें तो आप मोमबत्ती उद्योग को शुरू कर सकते हैं । चूंकि मोमबत्तियां बारहों महीने बिकती हैं इसलिए यह उद्योग बारहमासी चल सकता है ।
कच्चा माल : मोमबत्ती के दो प्रमुख हिस्से होते हैं - जलनेवाला पदार्थ और बत्ती ।
जलने वाला पदार्थ : जलनेवाला पदार्थ ऐसा होना चाहिए जो धुंआ या बदबू किए बगैर जलता रहे, गर्मी के मौसम में मुलायम न हो और सूत की बत्ती को डुबोने पर आसानी से बत्ती पर चढ़ जाए । पैराफीन मोम में उत्कृष्ट जलनेवाला पदार्थ के सभी गुण होते हैं । इसलिए इसका उपयोग करना बेहतर होता है । इसके लिए ऐसे पैराफीन वैक्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जिसका 120 से 140 डिग्री फारेनहाइट के बीच हो ।
कच्चे पेट्रोल को रिफाइन करने से पैराफीन वैक्स प्राप्त होता है । यह मोम सिल्लियों के रूप जूट के बोरी में पैक होकर आता है ।
सूत की बत्ती : सूत की बत्ती जलनेवाले पदार्थ यानी मोम को उचित मात्रा में लगातार मोमबत्ती की लौ तक पहुंचाती रहती है । हालांकि शुरू में सूत की सारी बत्तियों का प्रयोग किया जाता था ।


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