Niir Project Consultancy Services

हिसार का IMC और हरियाणा की नई औद्योगिक नीति 2026: उत्पादन इकाइयों के लिए बड़ा मौका

IMC हिसार में नई मैन्युफैक्चरिंग, MSME और औद्योगिक इकाइयों के लिए बड़े अवसर

हरियाणा में नया उत्पादन इकाई शुरू करने वालों के लिए हिसार में बन रहा IMC एक बड़ा मौका बन सकता है। IMC यानी समेकित औद्योगिक क्षेत्र करीब 2,988 एकड़ में तैयार किया जा रहा है। यह अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे का हिस्सा है।

इस परियोजना की खास बात सिर्फ इसका बड़ा क्षेत्र नहीं है। यहां उत्पादन इकाइयां के लिए पहले से प्लान किया गया बुनियादी सुविधाएं, औद्योगिक जमीन, माल ढुलाई व्यवस्था की सुविधा और अलग-अलग तरह के कारोबार के लिए अलग क्षेत्र रखने की योजना है। साथ ही हरियाणा की नई औद्योगिक नीति 2026 में भी उत्पादन और MSME को बढ़ावा देने के लिए कई रियायतें दी गए हैं।

इसलिए अगर कोई व्यक्ति नया कारखाना लगाने, MSME शुरू करने या मौजूदा कारोबार को बढ़ाने की सोच रहा है, तो IMC हिसार को अभी से समझना फायदेमंद हो सकता है।

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IMC हिसार क्या है और यह इतना खास क्यों है?

IMC हिसार को एक बड़े औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां अलग-अलग तरह की उत्पादन इकाइयां एक ही जगह पर काम कर सकें। इसके पहले चरण में करीब 1,605 एकड़ क्षेत्र शामिल है।

यह जगह महाराजा अग्रसेन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास है। इसके अलावा पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारा और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा की जुड़ाव भी इसे खास बनाती है। आसान भाषा में कहें तो यहां बनी कारखाना को माल मंगाने और तैयार माल भेजने के लिए रोड, रेल और हवाई माल ढुलाई—तीनों रास्तों का फायदा मिल सकता है।

परियोजना की संभावित पूंजी निवेश की क्षमता करीब ₹32,417 करोड़ बताई गई है और निर्माण लागत करीब ₹4,680 करोड़ है। लगभग 1.25 लाख रोजगार बनने का अनुमान भी दिया गया है।

IMC में धातु और इंजीनियरिंग, कपड़ा उद्योग और परिधान, खाद्य और कृषि प्रसंस्करण, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, माल ढुलाई और गोदाम व्यवस्था तथा हल्का उत्पादन जैसे क्षेत्र के लिए अलग क्षेत्र की योजना है।

हरियाणा की नई औद्योगिक नीति 2026 से क्या फायदा मिलेगा?

हरियाणा की नई औद्योगिक नीति 2026 को 18 मई 2026 को मंजूरी मिली और यह 26 मई 2026 से लागू हुई। इस नीति का लक्ष्य अगले पांच साल में ₹5 लाख करोड़ का पूंजी निवेश लाना और करीब 10 लाख नई नौकरियां पैदा करना है।

MSME के लिए हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026 भी महत्वपूर्ण है। पात्र MSME इकाइयों को क्षेत्र और कैटेगरी के हिसाब से 15% से 30% तक पूंजी पर आर्थिक सहायता मिल सकती है। इसके अलावा बिजली शुल्क में 10 साल तक पूरी छूट और 7 साल तक नेट SGST राशि की वापसी जैसे फायदे बताए गए हैं।

रोजगार बढ़ाने वाली इकाइयों को कर्मचारी के हिसाब से अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। निर्यात करने वाली इकाइयां के लिए निर्यात क्रेडिट पर ब्याज सहायता और सालाना माल ढुलाई सहायता का भी प्रावधान बताया गया है।

हिसार को डी-श्रेणी का प्राथमिकता वाला जिला में रखा गया है। इसलिए पात्र इकाइयों को नीति के अनुसार बेहतर रियायत मिलने की संभावना हो सकती है।

PADMA और एकल खिड़की 2.0 से क्या फायदा होगा?

हरियाणा सरकार ने MSME को छोटे शहरों और ब्लॉक स्तर पर बढ़ाने के लिए PADMA कार्यक्रम शुरू किया है। इसका मकसद ऐसे औद्योगिक समूह और औद्योगिक पार्क तैयार करना है जहां छोटी इकाइयों को जमीन, इमारत, बुनियादी सुविधाएं और बाजार से जुड़ने की सुविधा मिल सके।

PADMA के तहत पात्र औद्योगिक समूह को परियोजना लागत का 50% से 85% तक सरकारी सहयोग और अधिकतम ₹45 करोड़ तक सहायता मिलने का प्रावधान बताया गया है। इससे नई इकाई के शुरुआती बुनियादी सुविधाएं खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।

Haryana Udyog Portal के एकल खिड़की 2.0 के जरिए अलग-अलग सरकारी अप्रूवल और पूंजी निवेश से जुड़ी सेवाओं को एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश की गई है। नीति में रियायत जारी करने के लिए भी तय समय-सीमा रखी गई है।

राज्य में पुराने औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए ₹500 करोड़ का Saksham Fund और नए टेक्नोलॉजी आधारित नई कंपनी तथा MSME के लिए ₹200 करोड़ के नवाचार पूंजी कोष का भी उल्लेख किया गया है।

IMC हिसार में कौन-कौन से कारोबार शुरू किए जा सकते हैं?

1. धातु काटने-जोड़ने का काम और इस्पात पुर्जा

IMC हिसार के धातु और इंजीनियरिंग क्षेत्र में धातु काटने-जोड़ने का काम एक अच्छा कारोबार बन सकता है। इस्पात चादर काटने, मोड़ने, जोड़ाई और मशीन से पुर्जे बनाने से वाहन उद्योग, मशीनें और निर्माण कंपनियों के लिए अलग-अलग पुर्जा बनाए जा सकते हैं।

सिर्फ साधारण धातु काम के बजाय सटीक पुर्जे पर ध्यान करना अधिक लाभदायक हो सकता है। CNC मशीन, लेजर कटिंग और अच्छी गुणवत्ता की जोड़ाई के साथ ऑटो कंपनियों और बड़े उत्पादक को आपूर्ति की जा सकती है।

ऐसी इकाई के लिए हरियाणा और आसपास के राज्यों से कच्चा माल आसानी से लाने और तैयार माल को दूसरे शहरों तक भेजने में माल ढुलाई गलियारा मदद कर सकते हैं।

2. तकनीकी कपड़ा और परिधान

हिसार का कपड़ा उद्योग से पुराना संबंध है और IMC में कपड़ा उद्योग तथा परिधान के लिए अलग क्षेत्र की योजना है। इसलिए कपड़े की सामान्य उत्पादन के साथ तकनीकी कपड़े पर काम करना भी अच्छा विकल्प बन सकता है।

भू-तकनीकी कपड़ा, कृषि उपयोग का कपड़ा, औद्योगिक कपड़ा और सुरक्षात्मक कपड़ा जैसे उत्पाद सामान्य कपड़ों की तुलना में ज्यादा वैल्यू वाले हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल सड़क, खेती, कारखाना, मेडिकल और सुरक्षा से जुड़े कामों में होता है।

ऐसी इकाई घरेलू बाजार के साथ निर्यात बाजार को भी लक्ष्य कर सकती है। सही गुणवत्ता और प्रमाणन के साथ धीरे-धीरे कारोबार को बड़ा किया जा सकता है।

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3. खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित कारोबार

हरियाणा में गेहूं, सरसों, सब्जियों और डेयरी से जुड़े कच्चे माल की अच्छी उपलब्धता है। इसलिए IMC हिसार में खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उत्पादन के कई विकल्प बन सकते हैं।

गेहूं से आटा और दूसरे खाद्य उत्पाद, सरसों से तेल, फ्रोजन सब्जियां, हल्के खाद्य पदार्थ, दूध से बने उत्पाद और पैक किया हुआ खाद्य सामान जैसे कारोबार शुरू किए जा सकते हैं। किसान से सीधे कच्चा माल लेकर उसकी सफाई, प्रसंस्करण, पैकिंग और ब्रांडिंग करने से उत्पाद की वैल्यू काफी बढ़ सकती है।

महाराजा अग्रसेन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा की जुड़ाव भविष्य में जल्दी खराब होने वाले और ज्यादा कीमत वाले खाद्य उत्पाद को दूसरे राज्यों या निर्यात बाजार तक भेजने में मदद कर सकती है।

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IMC हिसार में बिजनेस अवसर और हरियाणा औद्योगिक नीति 2026 के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
IMC हिसार में नई मैन्युफैक्चरिंग, MSME और औद्योगिक इकाइयों के लिए बड़े अवसर

4. माल ढुलाई व्यवस्था, गोदाम व्यवस्था और शीत भंडारण व्यवस्था

IMC हिसार की सबसे बड़ी ताकतों में इसकी माल ढुलाई की सुविधा शामिल है। इसलिए माल ढुलाई और गोदाम व्यवस्था यहां लंबे समय के लिए अच्छा कारोबार बन सकता है।

उत्पादन इकाइयों को कच्चा माल रखने, तैयार माल रखने और अलग-अलग शहरों में भेजने के लिए गोदाम की जरूरत होगी। इसके अलावा फूड, डेयरी, दवा और जल्दी खराब होने वाले उत्पाद के लिए कोल्ड स्टोरेज और तापमान नियंत्रित स्टोरेज की जरूरत होती है।

एक ऐसा डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर भी बनाया जा सकता है जहां माल आए, कुछ समय के लिए रखा जाए और फिर Delhi-NCR, Punjab, Rajasthan, Uttar Pradesh तथा दूसरे राज्यों में भेज दिया जाए। IMC का स्थान फायदा इस कारोबार की सबसे बड़ी ताकत हो सकता है।

5. रक्षा पुर्जा और विमानन क्षेत्र आपूर्ति

IMC हिसार में रक्षा उपकरणों की आपूर्ति व्यवस्था के लिए अलग क्षेत्र की योजना है। भारत में रक्षा से जुड़े उत्पाद देश में बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इससे छोटे और मध्यम आकार के उत्पादक के लिए भी आपूर्ति व्यवस्था में जगह बन सकती है।

सटीक मशीन से पुर्जे बनाना, धातु पार्ट्स, खास तरह के पुर्जा और विमानन क्षेत्र आपूर्ति के लिए छोटी इकाई शुरू की जा सकती है। लेकिन इस क्षेत्र में सामान्य उत्पादन से ज्यादा कड़ी गुणवत्ता, टेस्टिंग और प्रमाणन की जरूरत होती है।

इसलिए इस कारोबार में उतरने से पहले यह पता करना जरूरी है कि किस कंपनी को कौन-सा पुर्जा चाहिए और उसके आपूर्तिकर्ता बनने के लिए क्या शर्तें पूरी करनी होंगी।

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निर्यात और आयात को कम करने का मौका

IMC हिसार की स्थान इसे सिर्फ घरेलू बाजार के लिए ही नहीं, बल्कि निर्यात के लिए भी उपयोगी बना सकती है। अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा के जरिए उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्र को पूर्वी बंदरगाहों से जोड़ने की योजना है।

कपड़ा उद्योग, खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग पुर्जा और दूसरे उत्पादन उत्पाद को दूसरे देशों में भेजने के लिए रेल, रोड और हवाई माल ढुलाई का इस्तेमाल किया जा सकता है। हरियाणा की नई MSME नीति में निर्यात बढ़ाने के लिए माल ढुलाई सहायता और निर्यात क्रेडिट पर ब्याज सहायता का भी प्रावधान है।

इसी तरह भारत जिन सटीक पुर्जे, तकनीकी कपड़ा या दूसरे औद्योगिक उत्पाद को विदेश से मंगाता है, उनकी देश में उत्पादन शुरू करना भी अच्छा मौका हो सकता है। इसे आयात-रिप्लेसमेंट कारोबार कहा जा सकता है।

सफल कारोबार से क्या सीख मिलती है?

किसी नए औद्योगिक क्षेत्र में कारोबार शुरू करने से पहले दूसरे सफल कारोबार से सीखना उपयोगी होता है। Bector Foods ने खाद्य प्रसंस्करण में गुणवत्ता और बड़े ग्राहकों पर ध्यान करके अपना कारोबार बढ़ाया। इससे सीख मिलती है कि शुरुआत से ही अच्छे संस्थागत खरीदार बनाना जरूरी है।

Shivalik Bimetal Controls ने सामान्य उत्पादन के बजाय खास और तकनीकी पुर्जा पर ध्यान किया और ग्लोबल बाजार बनाया। IMC हिसार में भी सिर्फ सामान्य उत्पाद बनाने के बजाय ऐसा उत्पाद चुनना बेहतर हो सकता है जिसकी मांग और मार्जिन दोनों अच्छे हों।

Vardhman Textiles ने कपड़ा उद्योग की अलग-अलग स्टेज पर काम करके अपनी आपूर्ति व्यवस्था मजबूत की। इससे यह सीख मिलती है कि समय के साथ कारोबार में वैल्यू बढ़ाने वाले नए उत्पाद जोड़े जा सकते हैं।

NPCS IMC हिसार के परियोजना में कैसे मदद कर सकता है?

IMC हिसार में कारखाना लगाने से पहले केवल जमीन और आर्थिक सहायता देखना काफी नहीं है। यह भी पता होना चाहिए कि उत्पाद की मांग कितनी है, मशीनों पर कितना खर्च आएगा, कच्चा माल कहां से मिलेगा, कितनी चलती पूंजी चाहिए और कारोबार कब मुनाफा में आ सकता है।

NPCS यानी Niir Project Consultancy Services उत्पादन और दूसरे कारोबार के लिए Market Survey और Detailed Techno-Economic Feasibility Report यानी DPR तैयार करता है। इसमें बाजार, मांग, उत्पादन प्रोसेस, मशीनें, कच्चा माल, कारखाना लेआउट, कर्मचारी और परियोजना की वित्तीय जानकारी शामिल की जा सकती है।

एक अच्छी DPR बैंक वित्त, सरकारी रियायत और पूंजी लगाएंर के सामने परियोजना रखने में मदद करती है। इसलिए बड़ा पूंजी निवेश करने से पहले व्यवहार्यता और परियोजना लागत की सही जांच करना जरूरी है।

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पूंजी निवेश करने से पहले किन बातों की जांच करें?

सबसे पहले यह देखें कि आपका उत्पाद IMC हिसार के किस क्षेत्र से जुड़ता है। इसके बाद बाजार, प्रतिस्पर्धा और संभावित खरीदार की जानकारी जुटाएं।

दूसरा, जमीन या इमारत, मशीनें, बिजली, पानी, स्थापना, कर्मचारी और चलती पूंजी सहित कुल परियोजना लागत निकालें। सिर्फ मशीनें की कीमत देखकर बजट तय न करें।

तीसरा, सरकारी रियायत को पहले से मिलने वाला पक्का पैसा न मानें। पात्रता, डॉक्यूमेंट और अप्रूवल की शर्तें जांचना जरूरी है। चौथा, पर्यावरण स्पष्टेंस, कारखाना लाइसेंस और जरूरी गुणवत्ता प्रमाणन की जानकारी पहले लें।

अंत में अपनी पूंजी, बैंक वित्त और चलती पूंजी का साफ प्लान बनाएं। सही प्लानिंग के बिना बड़ा कारखाना लगाना रिस्की हो सकता है।

IMC हिसार और हरियाणा की औद्योगिक नीति 2026 – मुख्य आंकड़े

विवरण जानकारी
कुल क्षेत्र 2,988 एकड़
पहला चरण 1,605 एकड़
संभावित पूंजी निवेश ₹32,417 करोड़
निर्माण लागत ₹4,680 करोड़
संभावित रोजगार 1.25 लाख
MSME पूंजी पर आर्थिक सहायता 15%–30%
बिजली शुल्क में छूट 10 साल तक
SGST राशि की वापसी 7 साल तक
निर्यात माल ढुलाई सहायता ₹30 लाख / इकाई / साल
PADMA सहायता अधिकतम ₹45 करोड़ / औद्योगिक समूह
Saksham Fund ₹500 करोड़
नवाचार पूंजी कोष ₹200 करोड़

निष्कर्ष: तैयारी अभी से शुरू करना बेहतर है

IMC हिसार हरियाणा के औद्योगिक नक्शे में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। करीब 2,988 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र, अलग-अलग उत्पादन क्षेत्र, हवाई अड्डे की नजदीकी और दोनों समर्पित माल ढुलाई गलियारों तक पहुंच इसे खास स्थान बनाती है।

हरियाणा की औद्योगिक नीति 2026 और एमएसएमई नीति 2026 से मिलने वाले रियायत इस मौके को और मजबूत करते हैं। धातु काटने-जोड़ने का काम, तकनीकी कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, माल ढुलाई व्यवस्था, शीत भंडारण व्यवस्था और रक्षा पुर्जा जैसे कारोबार में अच्छी मौका बन सकती है।

लेकिन सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र और सरकारी आर्थिक सहायता देखकर पूंजी निवेश नहीं करना चाहिए। सही उत्पाद, सही कैपेसिटी, खरीदार, कच्चा माल और वित्त का पूरा हिसाब पहले तैयार करना जरूरी है।

जो उद्यमी अभी से बाजार अध्ययन, व्यवहार्यता अध्ययन और DPR तैयार कर लेते हैं, उनके पास IMC हिसार के पूरी तरह विकसित होने से पहले अपनी तैयारी मजबूत करने का अच्छा मौका है।

References

  1. Startup India – Official Portal –https://www.startupindia.gov.in/
  2. Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises (MSME) –https://msme.gov.in/
  3. Udyam Registration Portal –https://udyamregistration.gov.in/
  4. Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) –https://dpiit.gov.in/
  5. Small Industries Development Bank of India (SIDBI) –https://www.sidbi.in/
  6. MUDRA / PMMY Official Portal – https://www.mudra.org.in/
  7. CGTMSE Official Portal –https://www.cgtmse.in/
  8. Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises –https://msme.gov.in/
  9. JanSamarth Portal (Government Loan Schemes) –https://www.jansamarth.in/

Frequently Asked Questions

IMC हिसार क्या है? +
IMC हिसार करीब 2,988 एकड़ में तैयार किया जा रहा एक बड़ा औद्योगिक उत्पादन क्षेत्र है। यह अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे का हिस्सा है।
यहां किन कारोबार के लिए जगह है? +
धातु और इंजीनियरिंग, कपड़ा उद्योग और परिधान, खाद्य और कृषि प्रसंस्करण, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, माल ढुलाई और गोदाम व्यवस्था तथा हल्का उत्पादन के लिए अलग क्षेत्र की योजना है।
MSME को क्या फायदा मिल सकता है? +
पात्र MSME को 15%–30% पूंजी पर आर्थिक सहायता, बिजली शुल्क में छूट, SGST राशि की वापसी और निर्यात से जुड़ी सहायता जैसे फायदे मिल सकते हैं।
हिसार को प्राथमिकता वाले जिले क्यों कहा गया है? +
मूल लेख के अनुसार हिसार डी-श्रेणी का प्राथमिकता वाला जिला है, इसलिए पात्र इकाइयों को नीति के अनुसार बेहतर रियायत मिल सकती हैं।
क्या यहां रक्षा कारोबार शुरू किया जा सकता है? +
हां। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के लिए अलग क्षेत्र की योजना है। सटीक पुर्जे और विमानन क्षेत्र आपूर्ति में मौके बन सकते हैं, लेकिन गुणवत्ता और प्रमाणन की शर्तें पूरी करनी होंगी।
कारोबार शुरू करने से पहले क्या करना चाहिए? +
बाजार, खरीदार, प्रतिस्पर्धा, मशीनें, कच्चा माल, परियोजना लागत और चलती पूंजी की जांच करके व्यवहार्यता अध्ययन और DPR तैयार करनी चाहिए।
NPCS क्या मदद करता है? +
NPCS बाजार सर्वे, व्यवहार्यता रिबंदरगाह और DPR तैयार करने में मदद करता है। इसमें उत्पादन, मशीनें, कच्चा माल, बाजार और वित्तीय जानकारी शामिल की जा सकती है।

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